Medicos Needs Justice.NEET Qualified 481 Students of U.P. Discharged Bcz of UPDGME's Fault

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हाल ही के शैक्षणिक सत्र 2016-2017 के लिए एम.बी.बी.एस. कोर्स के अंतर्गत नीट की व्यवस्था लागू की गई | बहुत से राज्यों ने इसी प्रवेश परीक्षा की मेरिट सूची के आधार पर दाखिला लेने का निर्णय अपनाया|किंतु पहली बार इतने बड़े स्तर पर नीट लागू होने के कारण व्यवस्था पूरी तरह बन नहीं पाई और परीक्षा व काउंसलिंग की आखिरी तिथि निकलने के बाद भी एम.बी.बी.एस. की 2000 व बी.डी.एस की 3000 सीटें खाली रह गई थी,जिसमें से सबसे ज्यादा अन्याय उत्तर प्रदेश के साथ हुआ|यहाँ अधिकतर हर निजी मेडिकल कॉलेज़ में उनकी आधी से भी ज्यादा,लगभग 1600 सीटें रिक्त रही| एेसे में 14 निजी मेडिकल कॉलेजों ने 481 विद्यार्थियों को यह आश्वासन देकर दाखिला दिया कि जल्द ही आपकी काउंसलिंग होगी क्योंकि उन्हें भी उम्मीद थी कि कोई भी सरकार इतनी भारी संख्या में सीटें रिक्त नहीं रखेगी|किंतु तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार इस पर मूकदर्शक बनी रही व कॉलेजों द्वारा कई बार गुहार लगाने पर भी यह कह कर अनदेखा कर दिया कि अभी चुनाव का समय है, इसे बाद में देखेंगे क्योंकि उनके लिए छात्रहित व राष्ट्रहित से चुनाव अधिक महत्व रखते होंगे|

हम चार माह से निरंतर कॉलेजों में अपनी एम.बी.बी.एस. की कक्षाओं व परीक्षाओं में नियमित रूप से उपस्तिथि दर्ज करा रहे थे|किंतु 27 जनवरी 2017 को एम.सी.आई. ने कॉलेज प्रशासन को एक प्रपत्र सौंप कर हमारे दाखिले निरस्त कर दिये| और यह कारण दिया कि इन विद्यार्थियों की काउंसलिंग यू.पी.डी.जी.एम.ई. द्वारा नहीं हुई है |
एक बात और है कि उस समय पर यू.पी.डी.जी.एम.ई. द्वारा काउंसलिंग प्रकिया बहुत ही अव्यवस्थित रूप से संचालित की गई थी| हम सभी विद्यार्थी नीट की परीक्षा में उत्तीर्ण हैं एवं हर प्रकार से योग्य हैं| केवल काउंसलिंग,जिसमें कि जाकर सिर्फ कॉलेज चयन करना था, क्या उसको आधार बनाकर किसी के भविष्य के साथ खेला जा सकता है?काउंसलिंग कोई लिखित परीक्षा या साक्षात्कार तो नहीं था| जिसमें हमारी कोई गलती ही नहीं, उसी की सज़ा हम पर क्यों थौपी जा रही है?यहाँ तक की हम सभी पीड़ित विद्यार्थियों के कॉलेज़ों को सत्र 2016-2017 बैच की एम.सी.आई. द्वारा मान्यता प्राप्त है|
सर्वोच्च न्यायालय ने 30 सितम्बर तक भी यू.पी. के सभी निजी कॉलेजों की भारी मात्रा में सीटें रिक्त रहने के कारण काउंसलिंग की तिथि 7 अक्तूबर तक आगे बढ़ा दी|इस निर्णय पर संज्ञान लेने में ही यू.पी.डी.जी.एम.ई. को तीन चार दिन लग गए| तत्पश्चात 5 व 6 अक्तूबर को जल्दबाजी में बड़े ही अव्यवस्थित रूप से व निर्धारित समय के विपरीत रातों तक काउंसलिंग हुई|7 तारीख को तो काउंसलिंग हुई भी नहीं|बार-बार काउंसलिंग के समय व स्थान में परिवर्तन हुए जा रहे थे जिस कारण हमारे जैसे इच्छुक छात्र/छात्राएँ उपस्थित नहीं हो पाए और यह बात सभी को पता है |
अगर एम.सी.आई. इस विषय पर पूर्वावगत थी तो उसे निर्णय लेने में चार माह का समय क्यों लग गया?क्यों सबने मिलकर हमारी जिंदगी व हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया? इस समय जो हमारी वेदनापूर्ण स्थिति है, हम उसके वर्णन से सहस्रों कदम दूर हैं|आप ही सोचिए, चार माह से एम.बी.बी.एस. की सहृदय शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों से जब उनका लक्ष्य, उनका सर्वस्व छीना जा रहा है, नष्ट किया जा रहा है, तो उनकी क्या स्थिति होगी| भावी भारत के निर्माताओं का भविष्य कुचला जा रहा है, ऐसे में आपकी सजगता बहुत महत्व रखती है |
हमारे दाखिले अमान्य घोषित करने की सूचना भी हमें चार माह पश्चात प्राप्त हुई|अाप ही कहें, कब तक इस देश में औपचारिकताओं के संदर्भ में विद्यार्थियों का शोषण होता रहेगा?इस कड़ी में बदलाव कब होगा? हम पर व हमारे माता-पिता पर इस समय क्या बीत रही है, इसका अंदाज़ा लगाइए|बहुत से विद्यार्थी तो मानसिक रोगों से ग्रसित होने की कगार पर हैं और कुछ तो आत्महत्या तक करने को तैयार हैं| इस समय हमारी शारीरिक व मानसिक स्थिति बहुत ही खराब व अक्षम है|विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हमारे भारत में चिकित्सकों की बहुत भारी कमी है जिसे 2031तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है|उस पर से इस प्रकार के निर्णय क्या राष्ट्रहित में होंगे की जब एक सत्र की हज़ारों सीटें खाली पड़ी हैं और साथ ही में योग्य विद्यार्थिसों के दाखिले अमान्य घोषित किये जा रहे हैं?
उत्तर प्रदेश के मेडिकल छात्रों के साथ ही इतना बड़ा अन्याय क्यों किया जा रहा है?उम्मीद है कि आपकी पारदर्शी ,संवेदनशील व राज्य एवं राष्ट्रहित में कार्यरत सरकार कभी भी अपने बच्चों को निराश नहीं करेगी व अतिशीघ्र उत्तर एवं सकारात्मक निर्णय करेगी|हम आपसे एक सुखद निर्णय की कामना करते हैं| कोई भी अव्यवस्थता या भ्रष्टाचार को हमारी व हमारे निर्दोष अभिभावकों की जिंदगी से प्रबल मत होने दीजिए | इस समय हमारे लिए आप सर्वस्व हैं | आपके पास यह अधिकार है और केवल आप ही यह निर्णय कर सकते हैं| हम 481 पीड़ित विद्यार्थियों पर अपनी विशेष कृपा करें व जल्द ही हमारे हित में निर्णय दें|हमारी कोइ गलती नहीं है|सभी पर्याप्त सबूत हमारे पास हैं कि हम योग्य हैं व किसी तरह कि बैकडोर एंट्री नहीं है| 

धन्यवाद

भवदीय
समस्त पीड़ित छात्र
उत्तर प्रदेश



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