#BhaktiOnWheels: बिड़ला मंदिर को विकलांग व्यक्तियों के लिए सुगम बनाएं

0 व्यक्ति ने हसताकषर गये। 500 हसताकषर जुटाएं!


मेरे दादी और बाबा मेरे जन्मदिन पर हमसे मिलने जयपुर आए और हम सबने भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए बिड़ला मंदिर जाने का प्लान बनाया। बिड़ला मंदिर जयपुर के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और यह यहाँ पर आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र रहा है। पर वहाँ पहुँचकर मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने मुझे अंदर तक झकझोर कर रख दिया और मेरी आँखों को आँसुओं से भर दिया।

जब हम सब मंदिर के मेन हॉल में जाने के लिए आगे बढे, तभी वहाँ खड़े गार्ड ने आकर हमें रोक दिया और उस गार्ड (ग) और मेरे पापा (प) के बीच जो वार्तालाप हुआ वो कुछ इस तरह से था-

ग- रुकिए! आप अंदर नहीं जा सकते।

प- क्यों?

ग- मतलब आप तो जा सकते हैं पर ये व्हीलचेयर अंदर नहीं जा सकती।

प- व्हीलचेयर अंदर क्यों नहीं जा सकती?

ग- व्हीलचेयर का अंदर जाना मना है। अगर आप मंदिर में अंदर जाकर दर्शन करना चाहते हैं तो व्हीलचेयर बाहर छोड़कर जाइए, नहीं तो बाहर रहिए।

प- (उनकी प्रतिक्रिया से दुःखी होकर) - ऐसा आपसे किसने कहा है?

ग- सर, नियम यही है। व्हीलचेयर का अंदर जाना मना है।

प- क्या मैं आपके सीनियर से बात कर सकता हूँ?

ग- (चुप रहा)

प- तो क्या आप ये कह रहे हैं कि जो व्यक्ति व्हीलचेयर पर है उसे मंदिर में पूजा करने का अधिकार नहीं है?

गार्ड के कोई उचित तर्क ना दे सकने पर पापा ने उसे जाने दिया और मेरी व्हीलचेयर आगे की ओर बढ़ाकर वहाँ पार्क किया जहाँ मेरा बाकी का परिवार बैठा था। तभी वहाँ के दूसरे गार्ड (ग) ने हमें देखा और वो चलकर हमारी तरफ़ आया जिसके बाद पापा (प) और उसके बीच कुछ ऐसा वार्तालाप हुआ:

ग- अरे, ये व्हीलचेयर अंदर ले जाना मना है। इसे बाहर छोड़िए।

प- क्या मतलब है आपका?

ग- मेरा मतलब है कि ये व्हीलचेयर बाहर छोड़िए और इसे अंदर चला कर ले जाइए।

प- अगर वो चल सकती तो क्या आपको लगता है कि वो इस व्हीलचेयर में बैठी होती?

ग- तब आप उसे अपनी गोद में उठाकर ले जाइए पर सर, ये व्हीलचेयर अंदर नहीं जा सकती।

प- व्हीलचेयर का अंदर जाना क्यों मना है?

इसके बाद भी हमें इस बात का कोई न्यायोचित तर्क नहीं मिला कि आखिर व्हीलचेयर का मंदिर के अंदर जाना क्यों मना है!

मैं बिड़ला ग्रुप के मंदिर के स्टाफ के व्यवहार से बहुत दुःखी हुई। वे अत्यंत ही संवेदनहीन और अशिष्ट थे। किसी से भी बात करने का एक तरीका होता है, जिसका उन्हें कोई भान नहीं था।

दुःख तो मुझे इस बात का भी है कि हमारे देश में अब तक विकलांगता के विषय में कोई जागरूकता नहीं है। यह किस्सा केवल आम लोगों की विकलांगता के प्रति संवेदनहीनता ही नहीं दिखाता बल्कि यह भी उजागर करता है कि किस तरह लोग विकलांग लोगों को उनके स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों से वंचित रखते हैं।

अगर मैं व्हीलचेयर पर बैठी हूँ तो इसलिए नहीं क्योंकि मुझे व्हीलचेयर पर बैठने में मज़ा आता है। मैं व्हीलचेयर इसलिए इस्तेमाल करती हूँ क्योंकि मैं कहीं भी जाऊँ पर अपने पैरों से चल नहीं सकती। और जो इंसान पैर से चल नहीं सकता है, उसके लिए उसकी व्हीलचेयर उसके शरीर के ही एक ज़रूरी अंग समान महत्वपूर्ण होता है क्योंकि जैसे आप अपने पैरों के सहारे चल रहे हैं, वैसे ही मैं व्हीलचेयर के सहारे चल रही हूँ और जैसे आप अपने पैरों के बिना नहीं चल सकते वैसे ही मैं अपनी व्हीलचेयर के बिना नहीं चल सकती।

मंदिर हम भारतीयों का गौरव होते हैं पर मैं हैरान हूँ ये जानकर कि एक विकलांग भारतीय का मंदिर में स्वागत नहीं है। जो मेरे साथ हुआ वो मेरे जैसे कई लोगों के साथ हुआ होगा। मेरे पास प्रार्थना करने का अधिकार है और मुझसे मेरा यह अधिकार छीनने का किसी को कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। इसीलिए मैंने बिड़ला ग्रुप के नाम यह पेटीशन शुरू की है।

मैं चाहती हूँ कि बिड़ला ग्रुप अपने मंदिरों को विकलांग लोगों के लिए सुगम बनाए। मेरी माँग है कि:

बिड़ला ग्रुप के सभी मंदिरों में विकलांग लोगों के लिए उपयोगी और आसान आधारिक संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) की व्यवस्था हो।

वे अपने स्टाफ को विकलांगता के विषय पर शिक्षित करें, संवेदनशील बनाएँ और उन्हें शिष्ट व्यवहार करने की सीख दें।

कम से कम, मंदिरों में व्हीलचेयर की मदद से चलने वाले विकलांग लोगों के लिए चौड़े रैंप बनवाए जाएँ।

मेरा आप सब से अनुरोध है कि आप सब इस पेटीशन पर हस्ताक्षर करें जिससे कि ईश्वर के घर में तो कम से कम विकलांगों के साथ ऐसा अन्यायपूर्ण भेदभाव होना बंद हो।

बिड़ला ग्रुप बेशक़ ही भारत के सबसे बड़े व्यापारी समूहों में गिना जाता है और मैं उम्मीद करती हूँ कि वे अपने ऊँचे नाम के जैसे ही ऊँचे काम करने की योग्यता भी रखते हों! मेरा बिड़ला समूह से निवेदन है कि इस मुद्दे पर न्यायोचित प्रतिक्रिया दें और भारत के अधिक से अधिक धार्मिक स्थलों को विकलांगों द्वारा उपयोग के लिए अनुकूल बनाने का नया रास्ता खोलें।

किसी की विकलांगता को उसे उसके समानता के अधिकार से वंचित रखने के लिए उपयोग करना अन्याय है। विकलांग इंसान  का भी सुविधाओं और सुगम एवं अनुकूल परिस्थितियों पर उतना ही अधिकार होता है जितना कि किसी अन्य पूरी तरह से समर्थ व्यक्ति को अधिकार है खुली और ताज़ा हवा में साँस लेने का।

कृपया मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और जितना हो सके इसे शेयर करके आगे बढ़ाएँ। चलिए हम समाज को बताएँ कि #BhaktiOnWheels भी मुमकिन है।