Retest of corona patients, when He/She discharge from government hospital in Maharashtra

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मुंबई/ महाराष्ट्र में सरकारी या नगरपालिका की होसपीटल से कोरोना पेशंट को वापस बिना टेस्ट किये छुट्टी देते हैं। Who और भारत सरकार के आयुश मंत्रालय की गाइडलाइन के हिसाब से कोरोना संक्रमित मरीज को होसपीटल से 10/12 दिन के बाद छुट्टी देने से पहले ये चेक लेना चाहिए की मरीज पुरी तरह कोरोना से मुक्त हो गया की नहीं? कोरोना मरीज में सबसे बड़ी तकलीफ ये होती है की कमजोरी आ जाती है। हमारी होसपीटल सिफँ ये देखती है की उनका ओकसीजन लेवल बराबर हो गया है और बुखार नहीं है पर काफी केस में देखा गया है की कोरोना सायलंट कीलर है, पेशंट को कोई तकलीफ या कोरोना के कोई लक्षण नहीं दीखे और अचानक तकलीफ की वजह से होसपीटल में ऐडमीट करते हैं, ऊनका टेस्ट करते हैं पर बहोत सारे केस में देखा गया की रिपोर्ट आने से पहले मरीज की मृत्यु हो गयी थी। ऐसा टेस्ट नहीं होने से ऐसे मरीज वापस कोरोना से संक्रमित हो शकता हैं या उसको दुसरा बिमारी लग शकता हैं। और मरीज और उनके परिवार के मन में भी डर रहेता है। यहाँ छुट्टी देने से पहले वापस Who की गाइडलाइन हिसाब से 3 टेेेस्ट होने चाहिए, पर पेशंट की संख्या के साामने संसाधन की कमी है तो कम से कम दो टेस्ट होने से ऐक बात तय हो जायेगी की पेेशंट पुरी तरह ठीक है और दोबारा संक्रमण होने का खतरा कम है। पहली नजर में लगेगा की कया जरूरत है पर ऐसा ध्यान देने से ऐक पेशंट पर बार बार ध्यान देना या शक्ति का व्यय करने हम बच जायेंगे। कोरोना का मुकाबला करके हराना है, हम सफल होंगे