बाबरी मस्जिद - राम जन्म भूमि विवाद का मैत्रीपूर्ण समझौता

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अयोध्या-राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद का विवाद एक बहुत बड़ी समस्या बनकर बहुत समय से हमारे समाज को प्रभावित कर रहा है। उससे सम्बन्धित लोगों का कहीं न कहीं अपना Vested Interest यानी निजी लाभ जुड़ा हुआ है। सालों तक चीटी की तरह रेंगते हुए कई साल पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया और इसके खिलाफ अपील माननीय सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी अब थक हार कर यह फैसला किया कि सबसे बेहतर हल यह है कि इस मसले को आपसी सदभाव से हल किया जाय, जिसके लिए एक तीन सदस्यीय मध्यस्ता कमेटी का गठन किया है।

पिछले 70 सालों से मुस्लिम और हिन्दू दोनों की तरफ के कुछ धर्म गुरुओं और नेताओं ने इस विवाद को दोनों समुदायों को लड़ाने का ही काम किया है। यह भी देखने की बात है कि 1947 से लेकर आज तक जितने दंगे फसाद हुए है उनमे किसी भी धर्म के धर्मगुरु, नेताओं या बड़े उद्योगपतियों का न ही जानी या माली नुकसान हुआ है। मरता है तो गरीब आदमी। अब समय आ गया है कि मुसलमान एक जुट होकर इस मसले का न्यायोचित और Practical हल ढूंढे।

हमारे फोरम ने बहुत से Intellectuals (बुद्धजीवियों) से चर्चा की और यह नतीजा निकला कि अब समय आ गया है मुस्लिम समाज इस मसले को अपने हाथों में लेकर एकजुट अपनी राय का इजहार करे और उससे मा0 सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराये जिससे उन्हें एक न्याय पूर्वक फैसला करने में आसानी हो।

बहुत से लोगों से राय मश्विरा करने के बाद इस फोरम ने एक चार नुकती फैसला आम जनता के अनुमोदन के लिए तैयार किया है, जो कि नीचे दिया जा रहा है। हमारी समझ से हम सबकी और देश की भलाई इसी मे है कि हमारा समाज इन बातों को मान ले तो हमें और इस देश को एक बड़े झंझट से छुटकारा मिल सकता है। अगर आप इससे सहमत हैं तो कृपया इसके अनुमोदन हेतु Digital दस्तखत कर दें।

चार बिन्दु यह हैं:

1.) इस देश के मुसलमान, स्वतः सदभावना के इरादे से, इस बात पर अपनी सहमति प्रकट करते है कि अयोध्या स्थित विवादित ज़मीन को राम मंदिर बनाने हेतु दूसरी पार्टी को दिया जाये जिससे की वहां राम मंदिर बन सके।

2.) उसके बदले मे अयोध्या मे किसी मुनासिब जगह पर मुसलमानों को लगभग 10 एकड़ जमीन एलाट कर दी जाय, जिससे कि वहां पर एक सुन्दर मसिजद तामीर की जा सके।

3.) सबसे खास बात यह है कि इस देश के मुसलमानों को यह आश्वासन दिया जाए कि इसके बाद मुसलमानों के सभी धार्मिक स्थलों की आजादी के समय जो स्थिति थी वह यथास्थिति कायम रहेगी और इस बात की गारन्टी मा0 सुप्रीम कोर्ट अपनी मोहर लगा कर देगी और उसको भारत के राष्ट्रपति का अनुमोदन प्राप्त होगा और यह यथास्थिति हमेशा के लिए कायम रहेगी।

4.) साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाये कि 1991 में बने The Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991, को स्पष्ट और पूर्णतः लागू करवाने कि जवाब देही, इलाके के MP, MLA, DM और SP कि होगी और ऐसा न करने पर उचित अनुशासनिक और कानूनी कार्यवाही कि जायगी।

अगर आप हमारे ऊपर लिखे सुझावों से सहमत है तो कृपया इस अपील पर अपने Digital दस्तखत करके इस देश में एक बार फिर से सदभावना की फ़िज़ा पैदा करने में हमारी मदद करें।

साभार

Amir Haider, Advocate & Social Worker
Moid Ahmed, Ex Minister, UP Government
Tariq Ghauri, Retd. Commissioner, Customs & Central Excise
Justice Badrud Duja Naqvi, Retd.
Waheed Siddiqui, Businessman & Social Worker
Aftab Ahmad Khan, Retd. Add. DGP CRPF

All India Muslim Forum for Ayodhya Dispute Settlement
5/5, Park Road, 4th Floor, Drosia Tower, Hazrat Ganj, Lucknow