स्वतँत्र एवँ पृथक "भारतीय मिचुअलफँड नियामक '

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निवेश के विविध विकल्पों मे से एक है पुँजी बाजार में निवेश का विकल्प । यहाँ पर निवेश से निवेशक को जहाँ आकर्षक प्रतिलाभ या आय होती है वहीं देश की वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ता और औद्यौगिक एवँ ब्यापार के विकास से रोजगार के अवसर भी विकसित होते हैं और अँततोगत्वा देश की अर्थब्यवस्था मजबूत हो जाती है ।

पुँजी बाजार  ( इक्विटी और डेट ) में निवेश को जुआ मुक्त बनाने के लिए समुचित ज्ञान, गहन अध्ययन और अत्यधिक सतर्कता की आवश्यक्ता होती है जो कि एक सामान्य ब्यक्ती ( आम आदमी ) के लिए सम्भव नहीं हो पाता और सामान्य ब्यक्ती के लिए इसे ही सम्भव कर देती है मिचुअलफँड की अवधारणा । भारत में युटिआई एक्ट ( युनिट ट्रस्ट आफ इँडिया एक्ट 1963 ) के द्वारा युनिट ट्रस्ट आफ इँडिया UTI के रूप में देश का प्रथम मिचुअल फँड निर्मित हुआ और तदुपरान्त बहुत से देशी और विदेशी नीजि मिचुअल फँड भारत में आए ।

मिचुअलफँड अर्थात साझा कोष आम निवेशकों का कोष होती है जिसका सँपुर्ण  कार्य ( निवेश,नियँत्रण और नकदीकरण ) मिचुअल फँड के द्वारा  सम्पन्न किए जाते हैं । एक सँस्था के रूप में मिचुअल फँड निवेशकों का विश्वास और निवेश प्राप्त करते हैं और उसे अपने ज्ञान ,अनुसँधान और चुनाव से पुँजीबाजार  के विकल्प में निवेश करते हैं । 

भारत में मिचुअलफँड  "सेबी" ( सिक्युरीटि एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इँडिया ) के दिशा निर्देशों एवँ नियँत्रण में कार्य करते हैं और समय समय पर सेबी इनका नियमन करते आ रही है पर  मिचुअलफँड के क्षेत्र में निरँतर घट रही गतिविधियों से स्पष्ट आभाष होता है कि इस ओर सेबी का समुचित और समग्र ध्यान नहीं है  एवँ मिचुअलफँड  हाउस के लिए  सेबी के दिशानिर्देश अपर्याप्त हैं। सेबी मिचुअलफँडों का नियमन करती है,  मिचुअलफँड उद्योग का विकाश करना उसकी प्राथमिक्ता नहीं है ।

  भारत में मिचुअलफँडों के निवेश विकल्पों के चुनाव एवँ निवेश से  भारतीय निवेशकों का विश्वास आहत हो रहा है जिसका एक छोटा उदाहरण अभी हाल ही मे  DHFL  के निवेश प्रपत्रों पर मिचुअलफँडों के निवेश पर हुए ऋणात्मक प्रभाव  में देखा जा सकता है । जनधन का निक्षेप और  निवेश प्राथमिक्ता के साथ सुरक्षित रहे इसका पुख्ता प्रावधान और निगरानी होना चाहिए जो भारत में नहीं दीखता । मिचुअलफँड के विपणन के क्षेत्र में भी भेंड़ चाल दिखाई देता है और वितरकों के लिए समान नियमन एँव निगरानी का अभाव है ।  मिचुअलफँड सही है पर यह विश्वास जनमानस में दिखाई नहीं देता यह मिचुअलफँडो के सकल एयुएम और बैंको की सकल जमा राशी के अँतर से स्पष्ट होता है और इसीलिए कहा जा सकता है कि अब भी भारत में  मिचुअलफँड बेहतर निवेश का एक आधुनिक मिथक ( नवीन परिकल्पना ) बना हुआ है   जिसका एक मुख्य कारण मिचुअलफँड के विकास एवँ सँवर्धन के लिए भारत में विशेष प्राधिकार का अभाव है ।

जब बीमा  लिए  IRDA, पेंन्शन के लिए  PFRDA कार्य कर सकते हैं तो मिचुअलफँड उद्यौग के निर्देशन एव् विकाश के लिए भी एक अलग नियामक  होना ही चाहिए जो इसके सभी पहलुओं ( पक्षों ) की सुरक्षा और विकाश के कार्य प्राथमिक्ता से  करे ।  मिचुअलफँड में निवेशकों की मेहनत की कमाई का निवेश तो होता ही है यह बहुत से लोगों के पारिवारिक जीवन यापन का सहारा भी होता है । साथ ही  विदेेशी निवेश के जोखिम से देश को बचा कर देश की मजबुत और स्थिर अर्थब्यवस्था का मार्ग भी प्रसस्थ करता  है इस लिए इसके  सँरक्षण और विकाश के लिए एक विशेष नियामक  होना  चाहिए ।