वेब शृंखलाओं के लिए नियम बनाए जाएँ

0 व्यक्ति ने साइन किए। 100 हस्ताक्षर जुटाएं!


मित्रो,

आजकल टीवी का स्थान मोबाइल फोन ले चुका है और मोबाइल पर माँग पर वीडियो की अवधारणा आ गई है जिस पर अनेक प्लेटफॉर्म हैं जो केवल और केवल अनैतिकता, कामुकता, नशाखोरी, गालीगलौज, घृणित हिंसा व अनैतिक यौन संबंध परोस रहे हैं। जाहिर है कॉलेज में दारू व सेक्स की ओर आकर्षित युवा पीढ़ी इन्हें हाथोंहाथ ले रही है, जो काम पॉर्न वेबसाइटों पर चोरी छुपे होता था, इन वेब शृंखलाओं के द्वारा खुलेआम हो रहा है।

इससे भारतीय समाज का तानाबाना छिन्नभिन्न हो रहा है, चौबीसों घंटे दारू, ड्रग्स और सेक्स के नशे में रहने वाले लोग अपनी कुंठाओं को कहानी बनाकर वेब सीरीजों के रूप में पिरो कर परोस रहे हैं। फिल्मों की तरह इनके के लिए कोई सेंसर बोर्ड नहीं है, सूचना और प्रसारण मंत्रालय भी कुंभकरण की नींद सो रहा है। छोटे-छोटे बच्चों व बच्चियों के साथ यौन अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, समाज में यौन अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, इससे पहले की देर हो जाए, हमें इसको रोकना होगा।

हाल ही में सुप्रसिद्ध गीतकार श्री प्रसून जोशी @prasoonjoshi_ ने रसभरी नाम की वेब शृंखला में अबोध बालिका के कामुक प्रदर्शन का विरोध किया है। इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार श्री अनंत विजय @anantvijay दैनिक जागरण में इन शृंखलाओं के लिए सख्त नियमों की वकालत कर चुके हैं।

हम सूचना और प्रसारण मंत्रालय से आग्रह करते हैं कि अविलंब वेब सीरीजों के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के विद्यमान नियमनों के अधीन लाया जाए अथवा इनके लिए नये कठोर नियम बनाए जाएँ।