संस्कृतभारतं समर्थभारतम्

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मित्रों!हम भारतवासी भौतिक रूप से विकासशील देशों में गिने जाते हैं ।किन्तु हमारा समाज भौतिक चकाचौंध की अन्धी दौड़ में पारिवारिक सामाजिक संबंधों में न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं कर पा रहा है । इसका कारण है हमारी संस्कृत भाषा, जिसे हमने जीवन से निकाल दियाहै 

अतः हमारी परंपरा हमारी विरासत सभ्यता संस्कार संस्कृति  संकटग्रस्त हैं, इन्हें बचाने तथा अपने नौनिहाल बच्चों को सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण के लिए संस्कृत भाषा अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बनाकर संस्कृत भाषा संरक्षण के लिए नई नीति बनाने हेतु आपका सहयोग एवं मार्गदर्शन आवश्यक है