# माननीय न्यायालय के आदेशों की नाफरमानी। छात्रों का शोषण।

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हम समस्त छात्र उत्तराखंड के अन्तर्गत संचालित निजी आयुर्वेदिक मैडिकल कॉलेजों की मनमानी के बारे मे आपको बताना चाहते हैं जो मूलभूत सुविधाए न होने पर भी छात्रो का सिर्फ आर्थिक शोषण करने मै लिप्त हैं व माननीय न्यायालय के आदेशों का बिना किसी डर के उल्लंघन कर रहे हैं।


1: वर्ष 2015 मैं उत्तराखंड सरकार तथा समस्त मैडिकल कॉलेजों ने मिलकर आयुर्वेदिक मैडिकल कॉलेजों मै शुल्क वृद्धि सम्भंधी आदेशजारी किया। जिसमे शुल्क 80000 से बड़ाकर 215000 कर दिया गया।

2: यह बडा हुआ शुल्क नये सत्र के साथ ही पुर्व मै प्रवेसित छात्रो से भी लिये जाने का आदेश हुआ।


3: उत्तराखंड सरकार तथा समस्त मैडिकल कॉलेजों के इस फैसले के खिलाफ हिमालयीय आयुर्वेदीक मैडिकल कॉलेज देहरादून के समस्त छात्रो ने राज्यपाल के समक्ष भी अपनी बात रखी पर कोई निर्णय न होने पर छात्र ललित मोहन तिवारी व अन्य ने सर्वप्रथम माननीय उच्च न्यायालय में याचिका  WPMS 3433/2016 दायर की। जिसे सुनने के बाद इस शुल्क पर रोक लगा दी गयी।


4:इसी प्रकरण पर माननीय उच्च न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 को निर्णय देते हुये इस शुल्क वृद्धि सम्बंधी आदेश को रद्द किया तथा जिन छात्रों से बड़ा शुल्क लिया गया उन्हे 14 दिन के भीतर लौटाने के निर्देश हुये।


5: फैसले के मुख्य बिन्दु:-
       (अ) supreme court guidelines के अनुसार निजी कॉलेजों मैं शुल्क निर्धारण हेतू शुल्क नियामक समिति Act-2006 बनायी जाती है जिसके अध्यक्ष हाई कौर्ट के सेवानिवृत जस्टिस होते है। यह आदेश बिना समिति के आदेश के निर्गत किया गया। 
        (आ)शासनादेश निर्गत होने की तिथी से या अगले सत्र से लागू होता है ना की पिछ्ले सत्र से।

 


6: माननीय उच्च न्यायालय के एकल्पीठ के इस आदेश के खिलाफ खंडपीठ मै 16 कॉलेजों की यूनियन ने मिलकर (SPA 596/2018) याचिका दायर की लेकिन 9 oct 2018 को फैसला देते हुये एकल्पीठ के आदेश को सही बताया गया।।

 

7: इसके बाद सरकार द्वारा 2 nov 2018 को हाई कौर्ट के आदेश पालन का आदेश जारी किया गया पर सभी कॉलेजों का कहना है कि उन्हे शासन से कोई आदेश नही मिले। कॉलेजों की दबंगाई इस कदर बड चुकी है की वह हाई कौर्ट व शासन के आदेश को नकारते हुए हम शुल्क नही लौटाएंगे बोल रहे हैं। 

 


8: संचालित कॉलेजों मै अधिकांश कॉलेज 4 BJP सांसदो व मंत्रियो के हैं उनका कहना है छात्र कही भी जाएं उनके द्वारा लिया गयी अतिरिकत शुल्क राशि नही दी जायेगी । छात्रों पर दबाब बनाया जा रहा है।अभी हाल मै ही उत्तराखंड के अन्तर्गत संचालित कई मैडिकल कॉलेजों की मान्यता भी मिनिस्ट्री द्वारा रद्द की गयी थी। उसके बावजूद भी लूट का खेल जारी है।

 


9: छात्रो द्वारा यह बात जब शासन के उच्चाधिकारियों को बताये गयी तो उनका कहना है की आदेश जारी किये जा चुके हैं इसके अलावा वे कुछ नही कर सकते। विश्वविधालय का कहना है कि प्राइवेट कॉलेज उनके अधिकार मै नही हैं।

 


10 नेताओ के कॉलेज के चलते कोई भी छात्रो का साथ देने को तैयार नही है। छात्रों ने इन कॉलेजों के खिलाफ तहसील परिसर डोईवाला मे 31 दिनो तक धरना दिया पर कुछ न हो सका। 

 


11. अब पुन: पूरे प्रदेश मै धरना प्रदर्शन चल रहे है लेकिन फिर भी माननीय उच्च न्यायालय के आदेशो की सरे आम धज्जियां उडायी जा रही हैं।
       आयुष मंत्री उत्तराखण्ड हरक सिंह रावत का खुद का एक मैडिकल कॉलेज होने से वे भी कॉलेजों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं।


11:- इस प्रकरण की सूचना PMO DELHI को भी दी गई पर अभी तक कुछ नही हुआ। सर हम छात्रो का संघर्ष व आवाज छात्रो को धमकाकर दबा दी जाती है।

    अत: हम चाहते है की सरकार की व प्राइवेट मैडिकल कॉलेजों की मनमानी  कौ रोककर छात्रों कौ न्याय दिलाया जाए। आप सभी अपने स्तर से हमे सहयोग करें।