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शादी की उम्र 18 तो ‘संबंधों’ की 16 क्यों हो?

This petition made change with 20 supporters!


आप अब भी इस गलत फैसले को रुकवा सकते हैं : ये हमारे बच्चों का मामला है, इसलिए मंत्री-समूह को ई-मेल कीजिए, प्रस्ताव रद्द करवाइए (Please sign the petition)

विरोध दरकिनार कर ‘संबंधों’ की उम्र घटाने पर बना ली सहमति : आखिरकार सरकार ने सांसदों व देश की भावनाओं को दरकिनार कर फैसला ले ही लिया। बुधवार को चिदंबरम की अगुवाई वाले मंत्री समूह ने सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र 18 से घटाकर 16 करने को मंजूरी दे दी। मसौदा वीरवार को कैबिनेट में पेश होगा। मंजूरी के बाद इसकी प्रति राजनीतिक दलों को सौंपी जा सकती है, ताकि वे सर्वदलीय बैठक में राय दें। अगर यहां सहमति बनी तो ही यह संसद में पेश किया जाएगा। विधेयक को पास कराने के लिए 22 मार्च तक का समय है। मंत्री समूह में शामिल तीन मंत्री अश्विनी कुमार, कृष्णा तीरथ व कपिल सिबल उम्र घटाने के पक्ष में नहीं थे। कांग्रेस समेत सभी दलों के अधिकांश सांसद भी खिलाफ हैं।

सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र घटाने के कानून के मसौदे को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। गुरुवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक 20 मिनट चली। इसमें सहमति से संबंधों की उम्र 18 से घटाकर 16 करने पर महज 5 मिनट ही बात हुई।

यहां से मंजूरी के बाद इसकी प्रति राजनीतिक दलों को भी सौंपी जा सकती है, ताकि वे सोमवार को सर्वदलीय बैठक में राय दें। सर्वदलीय बैठक में इस विधेयक पर सहमति बना पाना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। कई दल इसे भारतीय समाज के अनुकूल नहीं पाते हैं। अगर यहां सहमति बनी तो ही यह संसद में पेश किया जाएगा। सरकार के पास इस विधेयक को पास कराने के लिए 22 मार्च तक का समय है।

प्रस्ताव का खुलकर विरोध कर रहीं महिला व बाल विकास मामलों की मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा फिर उठाया, लेकिन उन्हें यह कहकर चुप करा दिया गया कि जीओएम में चर्चा हो चुकी है। अब इस पर किसी और चर्चा की जरूरत नहीं है। वहीं बैठक के बाद प्रधानमंत्री बाहर निकले तो सिर्फ इतना कहा कि बिल को मंजूरी दे दी गई है। बाकी सवालों को वे टाल गए। कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कांग्रेस व अन्य दलों में असहमति पर कहा कि अब सर्वदलीय बैठक और संसद में ही देखा जाएगा।
जब इस बारे में गृहमंत्री शिंदे से सवाल किया, तो जवाब मिला- हजारों लोगों ने जो ज्ञापन दिया था, उसी हिसाब से फैसला हो रहा है। हालांकि कई लोगों ने यह भी कहा है कि इसका दुरुपयोग होगा। मामला कैबिनेट में है, इसलिए कुछ नहीं कहूंगा।

उधर कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के सांसदों ने कहा है कि सरकार को ऐसा मनमाना फैसला नहीं लेने देंगे। संसद में इसका विरोध किया जाएगा। दूसरी ओर समर्थन करने वालों का तर्क है कि इससे देश में दुष्कर्म की घटनाओं में कमी आएगी।

सरकार का कहना है कि इससे यौन अपराधों में कमी आएगी। लेकिन खुद कांग्रेस के ही अधिकांश सांसदों ने इसे बचकाना फैसला बताया है। भास्कर ने सभी दलों के ९0 सांसदों से इस मसले पर विचार पूछे। 70 ने इसका सीधा विरोध किया है। इनमें 43 सांसद कांग्रेस के ही हैं। भाजपा, अकाली व कई निर्दलीय सांसदों ने भी इस पर आपत्ति जताई है। सोमवार को 90 सांसदों और तीन केंद्रीय मंत्रियों से पूछा था कि क्या आप यौन संबंधों की उम्र 16 करने पर सहमत हैं? 70 ने इसे गलत बताया। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में अध्यादेश विधेयक का रूप नहीं ले पाया। अब इस पर मंत्री-समूह फैसला करेगा। फैसला टला है, रद्द नहीं हुआ है; इसलिए हमें अपनी बात कहनी ही होगी..

आप अब भी इस गलत फैसले को रुकवा सकते हैं :
कैबिनेट की मंजूरी अंतिम नहीं है। पार्टियां खिलाफ हैं। कांग्रेस के भी कई सांसद विरोध में हैं। देखना है इनका विरोध संसद में नजर आता है या नहीं? ये हमारे बच्चों का मामला है। इसलिए हमें जनप्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ाना होगा कि वे ऐसा कानून न बनने दें। इसके लिए आप सीधे राजनीतिक दलों को ई-मेल करें। या

हमें एसएमएस करें- 8082005060 नंबर पर। हम आपके संदेशों को पार्टी प्रमुखों तक पहुंचाएंगे। सांसदों को बताएंगे। आपको सिर्फ यही लिखना है कि ...
-मैं सहमति से संबंधों की उम्र 16 करने का विरोध करता हूं। अपना नाम, शहर का नाम जरूर लिखिएगा।
ये हमारे बच्चों का मामला है, इसलिए मंत्री-समूह को ई-मेल कीजिए, प्रस्ताव रद्द करवाइए
सेक्स सम्बन्ध की उम्र 16 साल: सीधे मंत्री जी को बताइए क्या है आपकी राय
जीओएम में शामिल मंत्रियों के नाम और ई-मेल एड्रेस
· पी चिदंबरम : fm@finance.nic.in
· सुशील कुमार शिंदे : skshinde@sansad.nic.in
· कपिल सिब्बल : kapilsibal@hotmail.com
· अश्विनी कुमार : akumar@del2.vsnl.net.in
· कृष्णा तीरथ : min-wcd@nic.in

सरकार इतनी जल्दबाजी में क्यों?
अध्यादेश जारी होने के बाद संसद सत्र शुरू होने की तारीख से 6 हफ्ते में संशोधित कानून पर संसद की मंजूरी जरूरी है। 3 फरवरी को दुष्कर्म पर सख्त कानून के लिए अध्यादेश जारी किया गया था। 21 फरवरी को बजट सत्र शुरू हुआ। यानी 4 अप्रैल से पहले अध्यादेश पर संसद की मुहर जरूरी है। बजट सत्र दो चरणों में है। पहला चरण २२ मार्च को खत्म हो रहा है।
इसके बाद एक माह की छुट्टी, फिर २२ अप्रैल से दूसरा चरण शुरू होगा जो 10 मई तक चलेगा। सरकार के पास सिर्फ 22 मार्च तक का ही समय है। ऐसा नहीं होने पर संसद सत्र के खत्म होने बाद सरकार फिर से अध्यादेश ला सकती है।

अगर ये उम्र 16 हो गई तो तीन प्रमुख कानून बदलने पड़ेंगे
1 चाइल्ड मैरिज प्रोटेक्शन एक्ट 1929
2 प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्स 2012
3 भारतीय वयस्कता संशोधन अधिनियम 1999

सरकार संबंधों की उम्र घटाने के प्रस्ताव पर इतनी उतावली है कि वह इन तीनों कानूनों को खत्म करना चाहती है। खुद इस अध्यादेश में भी इन मामलों में न्यूनतम उम्र 18 साल ही है। तो फिर यौन संबंधों की उम्र घटाने पर क्यों तुली है सरकार?
· वोट डालने, शराब पीने का हक भी नहीं है 18 की उम्र से पहले
· 1969 में ब्रिटेन में वोट डालने की उम्र घटाकर 18 वर्ष की गई। चुनाव लड़ने की उम्र भी यही है।
· अमेरिका में 1971 में वोट देने की उम्र को घटाकर 21 से 18 किया था। जापान में यह उम्र सीमा 20 वर्ष है।
· 1989 में भारत में वोट डालने की उम्र 21 से 18 वर्ष की गई। चुनाव लड़ने की आयु सीमा 25 वर्ष है।
· ज्यादातर देशों में शराब पीने के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र 18 वर्ष है। अमेरिका में यह सीमा 21 वर्ष तय है।
· महाराष्ट्र में यह सीमा 25 वर्ष है। दिल्ली में 21 वर्ष का व्यक्ति शराब खरीद सकता है, परोस सकता है, पर पी नहीं सकता। अन्य राज्यों में सीमा 18 से 21 वर्ष है।
· एडल्ट फिल्में नहीं देख सकते हैं
· ड्राइविंग लाइसेंस नहीं ले सकते हैं
· हथियार लाइसेंस नहीं ले सकते हैं
· चुनाव में वोट भी नहीं डाल सकते हैं।
29 में से सिर्फ चार मंत्रियों ने राय रखी : बैठक में कुल 29 मंत्री मौजूद थे। लेकिन संबंधों की उम्र घटाने के मुद्दे पर सिर्फ चार (चिदंबरम, कृष्णा तीरथ, शिंदे और अश्वनी कुमार) ने ही राय रखी। कृष्णा तीरथ की आपत्तियों का चिदंबरम ने समर्थन तो किया, लेकिन इस पर चर्चा के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने ओके कहा और बैठक खत्म हो गई।

· उम्र घटाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता आपसी सहमति से संबंध बनाने की उम्र 18 तय है। इसे दोनों सदनों ने पास किया था। भारत सरकार ने भी हैग कन्वेंशन पर दस्तखत किए हैं। ऐसे में उम्र घटाकर 16 करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
- कृष्णा तीरथ, महिला एवं बाल विकास मंत्री

· सभी पहलुओं को सोचे बिना फैसला नहीं हो मैं सरकार के इस प्रस्ताव से कतई सहमत नहीं हूं। संबंध बनाना जिंदगी का अहम फैसला होता है। इसमें मैच्योरिटी जरूरी है। केंद्र सरकार को सारे पहलुओं को सोचकर ही कोई फैसला लेना चाहिए।
- परनीत कौर, विदेश राज्यमंत्री

· इसके दूरगामी परिणामों के बारे भी सोचना चाहिए मेरी व्यक्तिगत राय है कि सहमति से संबंध बनाने की उम्र नहीं घटानी चाहिए। ऐसा हुआ तो इसके कई दुष्परिणाम होंगे। सरकार को इसे दूरगामी नतीजों के बारे में सोचकर ही फैसला लेना चाहिए।
- जितेंद्र सिंह, रक्षा राज्यमंत्री

दलों को भी एतराज: सरकार के सहयोगी सपा, बसपा के अलावा भाजपा, शिवसेना, अकाली दल भी प्रावधानों से असहमत हैं। मंत्रियों और दलों का मानना है कि बिना सहमति के बिल संसद में लाए तो, इसका भी वही हश्र होगा, जो लोकपाल या दूसरे बिलों का हुआ।
सपा-बसपा विरोध में, राज्यों में भाजपा खिलाफ, केंद्र में चुप :

कांग्रेस : जिन 55 सांसदों से भास्कर ने पूछा, उनमें से 43 ने प्रस्ताव का विरोध किया।
कई मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री बिल के विरोध में।
सत्यव्रत चतुर्वेदी समेत कई स्थानीय नेता बिल से असहमत।

भाजपा : शिवराज, रमन समेत चार मुख्यमंत्री सहमत नहीं।
मप्र, झारखंड, छग, पंजाब, भाजपा विरोध में।
सुषमा, राजनाथ ने कहा संसद में रुख बताएंगे।

यूपीए सहयोगी: सपा और बसपा ने इसे समाज विरोधी बिल बताया।
लालू चुप। लेकिन झारखंड राजद अध्यक्ष ने कहा-हम सहमत नहीं।
कानून मंत्रालय तो 14 की उम्र तय करना चाहता है कानून मंत्री दुरुपयोग की आशंका जता रहे हों, लेकिन उन्हीं का मंत्रालय संबंध बनाने की उम्र को 14 वर्ष करना चाहता है। इसके पीछे तर्क है कि इस उम्र में हर किसी को सबकुछ समझ आता है।
मंत्री समूह में शामिल तीन मंत्री अश्विनी कुमार, कृष्णा तीरथ और कपिल सिबल उम्र घटाने के पक्ष में नहीं थे। कांग्रेस समेत सभी दलों के अधिकांश सांसद उम्र घटाने के खिलाफ हैं।

अन्य दल : झामुमो के शिबू सोरेन ने कहा कि हम विरोध करेंगे।
जेडीयू ने कहा कि हम संसद में बताएंगे रुख।
सीपीआई, जमाते इस्लामी हिंद, झाविमो समेत कई छोटे दल भी प्रस्ताव के विरोध में।
..और 90 सांसद भी खिलाफ में।

बाल अधिकार आयोग विरोध में, प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी : विदेशी संस्कृति लाद रही है सरकार :
मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गुरुवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, प्रधानमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र लिखा है। आयोग ने सहमति से संबंधों की उम्र घटाने का तीखा विरोध किया है। आयोग की अध्यक्ष उषा चतुर्वेदी ने बताया कि इससे बालिका सुरक्षा और शिक्षा अभियान पर गलत प्रभाव पड़ेगा। 16 साल के बाद अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरने लगेंगे। आयोग का कहना है कि केंद्र सरकार विदेशी संस्कृति को भारत पर लादने की कोशिश कर रही है।

सांसदों ने मंत्रियों से कहा : देश की भावनाओं के खिलाफ है उम्र कम करने का प्रस्ताव, सरकार ने प्रस्ताव मंत्री-समूह को सौंपा, बैठक भी हुई लेकिन फैसला नहीं; आज फिर चर्चा करेंगे 18 साल से पहले नहीं मिल सकते ये अधिकार इस अध्यादेश को सरकार दिसंबर महीने में लेकर आई थी। नियम के मुताबिक संसद के मौजूदा सत्र के पहले चरण (22 मार्च तक) में अगर इसे मंजूरी नहीं मिल पाई तो ये खुद-ब-खुद निरस्त हो जाएगा।
यानी सरकार के पास अध्यादेश के बदले लाए जाने वाले संशोधन विधेयक पर मुहर लगाने के लिए 22 मार्च तक का ही समय है। ऐसा नहीं होने पर सत्र खत्म होने के बाद सरकार को फिर से अध्यादेश लाना होगा। यानी सरकार को समाज में आने वाली विसंगतियों से ज्यादा अध्यादेश के कागजों की चिंता है।
· जीओएम के 5 में से 3 मंत्री विरोध में
· अश्विनी कुमार को दुरुपयोग का डर है।
· कृष्णा तीरथ इसे गैरजरूरी बता रही हैं।
· कपिल सिब्बल का मानना है कि चुनौती दी गई तो यह कोर्ट में नहीं टिक पाएगा।
· बाकी भी राजी नहीं
· वीरह्रश्वपा मोइली ने बलात्कार की परिभाषा पर ही सवाल खड़े कर दिए।
· रहमान खान ने कानून मंत्री से पूछा कि अगर इस कानून का दुरुपयोग होता है तो रोकथाम के क्या उपाय हैं।

शिवराज भी विरोध में : मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी कहा कि मैं इसके पक्ष में नहीं हूं, क्योंकि यह समस्या का वास्तविक समाधान नहीं है।

आंखें मूंदकर समर्थन भी :
· इसमें हर वर्ग की भलाई छिपी होगी। - जयपुर से कांग्रेस सांसद महेश जोशी
· कुछ अच्छा सोचकर ही लिया होगा फैसला। - जालंधर से कांग्रेस सांसद मोहिंदरसिंह केपी
· मैं सत्तापक्ष का सांसद हूं। विरोध कैसे कर सकता हूं। - करौली से कांग्रेस सांसद खिलाड़ीलाल बैरवा
· युवा पीढ़ी जो चाहती है, उसी हिसाब से फैसला हो रहा है। - उदयपुर से कांग्रेस सांसद रघुवीरसिंह मीणा

गृह और कानून मंत्रालय का तर्क :
केंद्रीय गृहमंत्रालय सहमति से यौन संबंध के लिए 16 साल की उम्र तय करना चाहता है। दलील है कि युवाओं को बचाना जरूरी है। वहीं कानून मंत्रालय तो एक कदम और आगे है। वह चाहता है कि 16 नहीं, यह उम्र 14 वर्ष कर दी जानी चाहिए। महिला संगठनों ने भी जस्टिस वर्मा की सिफारिश मानने की मांग की है।
इसमें 16 साल की उम्र तय करने को कहा गया था। लेकिन कमेटी ने 37बी(1) जोड़ा था। इसके मुताबिक 16 साल से कम उम्र से संबंध बनाने पर 10 साल से उम्रकैद तक की सजा तय की गई। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेंस एसो. की महासचिव सुधा सुंदरम का कहना है कि सहमति से संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी में रखना ही नहीं चाहिए।

18 साल से कम उम्र के बच्चों की इन चिंताओं पर ध्यान क्यों नहीं?
देश में लगभग 45 करोड़ से ज्यादा बच्चे 18 साल से कम उम्र के हैं। देशभर के सांसदों, विशेषज्ञों का कहना है कि सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र घटाने से ज्यादा जरूरी है इन्हें सही तरीके से जीने का अधिकार देना। लेकिन इस ओर सरकार का ध्यान ही नहीं है।
· जल्दी शादी हो रही है: 1 करोड़ से ज्यादा की कम उम्र में शादी हो जाती है।10 लाख से ज्यादा बच्चियां हर साल मां बन जाती हैं।
· अपराधी बन रहे हैं : 2011 में इस उम्र के 21,657 बच्चे किसी न किसी अपराध में शामिल रहे। गरीबी बड़ा कारण।
· नशे की गिरफ्त में हैं: हर पांच में से एक बच्च नशे की गिरफ्त में। कई बच्चे 13 से 15 सिगरेट रोज पी रहे हैं। 15% बच्चे शराब तक पी रहे हैं।
· पढ़ नहीं पा रहे हैं : 2.4 करोड़ बच्चों के नाम स्कूलों में दर्ज नहीं हैं। जिनके नाम दर्ज हैं, उनमें भी 64 प्रतिशत स्कूलों में कभी-कभार ही जाते हैं।
· खाना नहीं मिल रहा है : 1.1 करोड़ बच्चियों का वजन औसत से कम। गरीबी की वजह से पोषक आहार न मिलने से सवा करोड़ लड़कियां और 60 लाख लड़कों में खून की कमी।
· करोड़ बच्चियों का वजन औसत से कम: गरीबी की वजह से पोषक आहार न मिलने से सवा करोड़ लड़कियां और 60 लाख लड़कों में खून की कमी।
· अपना घर छोड़ रहे हैं : 40 लाख से ज्यादा बच्चे हर साल रोजी-रोटी के लिए घर छोड़ देते हैं। 10 से १५ लाख बच्चे अन्य वजहों से घर छोड़ने को मजबूर हैं।
· मजदूरी कर रहे हैं : 50 लाख से ज्यादा बच्चे मजदूरी कर रहे हैं। इनमें भी 20 लाख बच्चे खतरनाक श्रेणी के कामों में लगे हैं।
· फैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल नहीं कर रहे हैं : 60% लड़कियों और 35 प्रतिशत लड़कों को फैसले लेने में शामिल नहीं किया जाता। ऐसे में उन्हें अपने लिए फैसले लेने के लिए कैसे छोड़ा जा सकता है?
· यौन शिक्षा नहीं दे रहे हैं : 72% को यौन शिक्षा नहीं मिलती। इससे एड्स, टीन एज प्रेगनेंसी और बच्चियों के अबॉर्शन की घटनाएं बढ़ेंगी।
(स्रोत : यूनिसेफ, केंद्रीय सांख्यिकी विभाग, एनसीआरबी, योजना आयोग, जनगणना-२क्११ और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण)

मेरा गुस्सा तीन दिन में 7,200 से ज्यादा एसएमएस
ये बच्चों की जिदंगी से जुड़ा गंभीर मसला है। हमें हर दिन पाठकों के संदेश मिल रहे हैं जो सरकार के प्रस्ताव से नाराज हैं। चुनिंदा एसएमएस यहां छापे जा रहे हैं।
· ‘संबंधों’ की उम्र घटाने के बजाय नेताओं की उम्र घटानी चाहिए। 60 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को संसद से बाहर निकालो। तब पता चलेगा कि किस उम्र में कौन सा काम करना चाहिए। भरत -वरूड (महाराष्ट्र)

· जो सांसद 16 की उम्र से सहमत हैं, उनके बच्चों पर लागू हो कानून

· जिन सांसदों और मंत्रियों को लगता है कि संबंधों की उम्र 16 साल होनी चाहिए, यह कानून केवल उनके बच्चों पर लागू किया जाए। तब जाकर उन्हें पता चलेगा कि जो फैसला उन्होंने लिया है वह सही है या गलत। -मेदिनी रायपुर (छत्तीसगढ़)

· ऐसे फैसलों से समाज में अपराध बढ़ेगा- जो उम्र अभी निर्धारित है वह सही है। सरकार जो फैसला लेना चाह रही है उससे समाज में अपराध बढ़ेगा। इससे अच्छा कि कानून कड़ा करे, ताकि ऐसे फैसले न लेने पड़े। -माही शिवांशी- बालाघाट (मप्र), भावेश-बड़ौदा (गुजरात)

· पुराने कानून संभाल नहीं पा रहे, नए बनाएंगे- देश की सरकार पुराने कानून को तो सही ढंग से लागू नहीं कर पा रही। नए बनाने पर जुटे हैं। वह भी ऐसा जो युवा पीढ़ी को खराब कर देगा। इस उम्र में तो बच्चे सोच भी नहीं पाते। -प्रदीप -हिसार, जीआर चौधरी (राजस्थान)

· भगवान देश में किसी को बेटी न देना, नेताओं का इरादा नेक नहीं है

· देश की जनता इन नेताओं से क्या उम्मीद करे। इनका बस चले तो कोई भी कानून बना दें। ऐसे कानून से अच्छा है कि भगवान किसी के घर में बेटी ही न पैदा करे। ऐसे कानून से लड़कों और लड़कियों दोनों का नुकसान होगा। -पवन सैनी-अंबाला, सुरेश बेनीवाल-फतेहाबाद (हरियाणा)

· 18-21 की उम्र शादी-संबंध दोनों के लिए सही- शादी की उम्र 18-21 है, इसलिए संबंधों की उम्र भी यही रहनी चाहिए। इसी उम्र में बच्चे मैच्योर होते हैं। उम्र घटाने पर कानून बनाना बेहद गलत है। -विरेंद्र ताम्रकर-कटनी (मप्र)-सुरेश सैनी (राजस्थान)

· उम्र घटाने से शिक्षा दर में भी कमी आएंगी-सरकार के इस फैसले से शिक्षा दर में कमी आएगी। नासमझी में बच्चे बड़े अपराधों की तरफ अग्रसर होंगे। यह समाज के हित में नहीं है। - अक्षय बंसोड, बेतूल (मप्र) - सैयद आजम, शिमला (हिमाचल)

· देश को अमेरिका बनाना चाहते हैं नेता :

· देश के नेता संबंधों की उम्र घटाकर देश को अमेरिका बनाना चाहते हैं। वे उम्र घटा सकते हैं पर कड़ा कानून नहीं बना सकते। इसलिए दिल्ली दुष्कर्म मामले में नाबालिग आरोपी का मामला अलग चल रहा है। -कमरुद्दीन-गाजियाबाद(उप्र)

· देश और संस्कृति को मारने का कदम- जिस देश को मारना हो तो उसकी संस्कृति को मारो, देश अपने आप मर जाएगा। दुष्कर्म के मामले बढ़ जाएंगे। अगर अपराधियों को कड़ी सजा दी जाए तो ऐसे कानून की जरूरत ही नही पड़ेगी। - अजरुन गोस्वामी-सावरकुंडला (गुजरात)

· उम्र घटाना मर्यादा के खिलाफ होगा-उम्र घटाने का कानून बनाकर नेता लोग मर्यादा के खिलाफ काम कर रहे हैं। इन नेताओं के खून की जांच होनी चाहिए..लोगों को पता तो चले लाल है या काला। - कमल जोशी- महुआ -किरन भगत जागडिया, भरूच (गुजरात)

· ऐसे कानून से आज का युवा दिशाहीन जिंदगी जीने पर मजबूर हो जाएगा। -सुषमा सिन्हा (बिहार)

· वोट उन्हें जो 18 साल के पक्ष में होगा :

· मैं अपना वोट उन्हीं जनप्रतिनिधियों को दूंगा जो १८ साल की उम्र के पक्ष में होंगे और इसके लिए संसद में लड़ेंगे। उम्र घटाना बेहद गलत है। युवा पीढ़ी इसके पक्ष में नहीं। -एस. त्रिवेदी अहमदाबाद(गुजरात), नरेंद्र कुमार बघेल-मंडला (मप्र)

· उम्र घटाएंगे पर दुष्कर्मियों को सजा नहीं देंगे-सरकार उन दुष्कर्मियों को सजा नहीं देती जो खुलेआम लड़कियों की आबरू छीनते हैं। अपराधियों की मानसिकता तो बदल नहीं सकते, उम्र जरूर घटाएंगे ये नेता। इनकी मति मारी गई है। -सृष्टि, बिलासपुर - मनीष रघुवंशी (मप्र)

· क्या इस फैसले से देश में दुष्कर्म कम होंगे?- देश के नेता पहले ये बताए कि क्या इस कानून के बनने के बाद देश में दुष्कर्म कम हो जाएंगे? जरूरत है अच्छी शिक्षा व संस्कृति देने की, न की कानूनी तौर पर उम्र घटाने की। - दीपक किरोरी नई दिल्ली - शुभम, बीड (महाराष्ट्र)

· ये बच्चों की जिदंगी से जुड़ा गंभीर मसला है। हमें हर दिन पाठकों के संदेश मिल रहे हैं जो सरकार के प्रस्ताव से नाराज हैं। चुनिंदा एसएमएस यहां छापे जा रहे हैं।

· ‘संबंधों’ की उम्र घटाने से देश में दुष्कर्म कम होने की गारंटी मिलेगी? दुष्कर्मी तो तीन साल की मासूम बच्चियों को भी नहीं छोड़ते। उम्र में कमी करना गुनहगारों पर रहम होगा। -टीना सुमन -जयपुर (राजस्थान)

· सरकार ‘संबंधों’ को ज्यादा तरजीह देती है बजाय शादी की उम्र के

· गजब की सरकार है। शादी की 18 और ‘संबंधों’ की 16 साल की उम्र को सही ठहरा रही है। यानी वे शादी से ज्यादा संबंधों को तरजीह देते हैं। ये तो देश में पश्चिमी सभ्यता लाना चाहते हैं। जब नेताओं के बच्चे ऐसे संबंध बनाएंगे तब उन्हें पता चलेगा। -लक्ष्मण पटेल, इंदौर (मप्र) - प्रियंका, जयपुर (राजस्थान)

· हमारी सभ्यता को तार-तार कर रहे हैं नेता- हम भारतीय हैं, हमारी सभ्यता की मिसाल पूरी दुनिया देती है। संबंधों से हमारी संस्कृति झलकती है। इसे ये नेता तार-तार कर रहे हैं। ऐसा कानून अपनाना ही अपराध है। -माही शिवांशी- बालाघाट (मप्र), भावेश-बड़ौदा (गुजरात)

· महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ेगा- ‘संबंधों’ की उम्र नहीं घटानी चाहिए, क्योंकि इससे महिलाओं व लड़कियों के खिलाफ अपराध बढ़ेगा। इस फैसले से सांसदों और मंत्रियों की असंवेदनशीलता दिखाई पड़ती है। -प्रदीप -हिसार, जीआर चौधरी (राजस्थान)

· बच्चों की बुरी आदतों को कम करो ताकि वे संपूर्ण विकास कर सकें

· देश भर में बच्चे कुपोषण, नशे व अपराध की गिरफ्त में हैं। उनकी बुरी आदतें कम करनी चाहिए। संबंधों की उम्र घटाने से हो सकता है कि बच्चे आजादी का दुरुपयोग करे। माता-पिता के लिए उन्हें सभ्यता और संस्कृति सिखाना और मुश्किल होगा। -गोपाल बरोट-सुरेंद्रनगर (गुजरात), दीपेंद्र-हजारीबाग (बिहार)

· इससे देश की आबादी और बेरोजगारी बढ़ेगी- ऐसे ‘संबंधों’ से देश की आबादी बढ़ेगी, फिर बेरोजगारी और बाद में अपराध। कमजोर प्रशासन-पुलिस अपराध को नियंत्रित नहीं कर पाएगी। -सुभाष चौहान-शाजापुर (मप्र)-राजेश भादू हिसार (हरियाणा)

· ड्राइविंग, वोटिंग की भी उम्र कम करो-सरकार ‘संबंधों’ की उम्र घटाए पर साथ ही ड्राइविंग, वोटिंग और शादी की उम्र भी घटाए। तब जाकर सही कानून बनेगा। नहीं तो सारे कानून खत्म करें। - प्रकृति जैन, दुर्ग (छत्तीसगढ़)- उमेश शर्मा (राजस्थान)

· सरकार दुष्कर्म की परिभाषा बदल रही है

· सरकार जब गरीबी कम न कर सकी तो उसने गरीबी की परिभाषा बदल दी। दुष्कर्मी को सजा नहीं दे पाई जो दुष्कर्म की सजा बदलने जा रही है। ये सरकार अगले एक दशक में न जाने क्या-क्या बदल देगी। -इनामुल बाराबंकी- नई दिल्ली

· बच्चों की बाकी समस्याओं को तो कम करो- बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं है, हजारों बच्चे भूखे और कुपोषित हैं। ऐसी समस्याओं को मिटाने के बजाय सरकार नई समस्याओं को पैदा करने का काम कर रही है। - विनय कुमार-पठानकोट(पंजाब)

· लड़कियों की परेशानी और बढ़ेगी-इस कानून के आने के बाद लड़कियों की परेशानी और बढ़ेगी। उनकी शिक्षा और रोजगार संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाएंगी। क्या सरकार ने लड़कियों के लिए कुछ अच्छा सोचा है। - सोनम सिंह- कोटा (राजस्थान) -एके तिवारी, जमशेदपुर (झारखंड)

· सरकार अन्य महत्वपूर्ण विषयों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ऐसे कानून लेकर आती है। -गजेंद्र पवार सोलापुर,(महाराष्ट्र)

· एक दिन जनता समझाएगी सरकार को

· वर्तमान सरकार की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। चुनाव जीतने के लिए ऐसे उल्टे कदम उठा रही है। गीता में सही लिखा है- विनाश काले विपरीत बुद्धि। एक दिन जनता समझाएगी सरकार को। -रवि- राजकोट (गुजरात), सुनीता शर्मा-रामगढ़ (बिहार)

· उम्र घटाने से पहले युवाओं से पूछते तो सही-हमारी उम्र भी कम है। ये फैसला चिंताजनक है। सरकार को कम से कम ऐसे फैसले लेने से पहले युवाओं से पूछना चाहिए। सख्त कानून बनाने के बजाय संबंधों की उम्र घटाना कहां सही है। -कृतिका जोशी, (राजस्थान) - राखी कश्यप (पंजाब)

· अब बाल विवाह का समर्थन करेंगे नेता?- देश के नेता अगले कुछ सालों में वोट के लिए बाल विवाह का समर्थन करेंगे। जब तक जनता विरोध नहीं करेगी तब तक सरकार जागते हुए सपने देखती रहेगी। - प्राची शर्मा शिमला(हिप्र) - स्वपनिल प्रधान, भोपाल (मप्र)



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