मेरे देश मे भी हो एक राष्ट्रभाषा

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1-भारत का संविधान पंथ निरपेक्ष है, इसलिये यहाँ कि राष्ट्रभाषा भी कोई ऐसी भाषा बने जो भाषा निरपेक्ष भाषा हो। भारत में प्रचलित सभी भाषाओं में हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जिसमे विश्व की अनेक भाषाओं के शब्द और यहाँ प्रचलित सभी आंचलिक बोलियों के शब्दों का एक समूह ही हिंदी है इसलिये हिंदी को भाषा निरपेक्ष भाषा भी कहा जाता है।
भारत जब स्वतंत्र राष्ट्र बना तब देश की संविधान परिषद् ने 14 सितंबर 1949 मे हिंदी को राष्ट्रभाषा तथा देवनागरी लिपि को राष्ट्रलिपि के रूप में मान्यता प्रदान की, किंतु 26 जनवरी 1965 को संविधान के अनुच्छेद 343 के अधीन हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित तो किया गया किन्तु राष्ट्रभाषा नही।
2- भारतीय तथा अनेक विदेशी लोग भी भारत को हिन्दुस्तान कहते हैं, यह परम्परा हमे प्राचीन काल से मिलती है अर्थात भारत का एक दूसरा नाम हिन्दुस्तान भी है इसलिये हिन्दुस्तान की राष्ट्रभाषा हिन्दी ही होनी चाहिए।
3-राजभाषा अधिनियम की धारा 3/1 के अधीन राजकीय कामकाज में हिन्दी के साथ अंग्रेजी को सहभाषा के रूप में प्रचलित रखने का प्रावधान किया गया, जिसकी अवधि 15 वर्ष निश्चित की गई, किन्तु राजभाषा अधिनियम की धारा 3/2 के अनुसार यह प्रावधान किया गया कि जब तक भारत के एक भी राज्य की सरकार हिन्दी को अपने राज्य की राजभाषा स्वीकार नहीं करेगी तब तक हिन्दी पूरे देश की राष्ट्रभाषा नही हो सकती।
हिन्दी राष्ट्रभाषा बने इस पक्ष में मेरी मांग है कि जब भारत सरकार ने हिन्दी को महत्व देते हुए इस भाषा के ₹ अक्षर को भारत की आधिकारिक मुद्रा की पहचान हेतु चिन्ह के रूप में प्रयोग किया यह चिन्ह भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण के तहत है जो भारतीय संस्कृति को प्रकट करता है तथा श्री उदय कुमार द्वारा चिन्हित किया गया है।
वर्तमान समय में यह हिंदी का ₹ अक्षर विश्व की 5वी मुद्रा प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहचान बना चुकी है, इस ₹ का अनुकरण भी खूब हुआ। आज किसी भी उपभोक्ता सामान के मूल्य के स्थान पर यह प्रतीक चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ जाता है।
इस प्रतीक चिन्ह ₹ का पुरे देश किसी भी राज्य ने विरोध नही किया ।
इसी स्वीकारोक्ति को आधार मानकर अब हिन्दी बने भारत की राष्ट्रभाषा। 

समाधान । प्रत्येक राज्य की प्रचलित बोली को उस राज्य की राजभाषा काा सम्मान देते हुए , हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा बनाई जाय।

असर,। 

प्रत्येक देश की राष्ट्रभाषा उस देश की एक विशिष्ट पहचान होती है,इस पहचान से मेरा देश वंचित है, हिंदी को  भारत की राष्ट्रभाषा बन जाने से विश्व पटल पर भारत की एक अलग पहचान बन जाएगी जो भारत और भारतवासियों के लिए गौरव की बात होगी।