राजीव गांधी का भारत रत्न वापिस लिया जाए

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आदरणीय राष्ट्रपति जी,

नमस्कार । 1984 सिख विरोधी नरसंहार जिसमे 10,000 से ज्यादा सिखों की हत्या हुई इस देश पर कांग्रेस द्वारा दिया गया एक काला दाग है l आज़ाद भारत मे इस तरह की घटना ने अंग्रेजो और मुग़लो के अत्याचार को भी पीछे छोड़ दिया।  अपने ही नागरिकों की जान की कीमत 50 रुपये और एक शराब की बोतल लगाई गई । वोटर लिस्ट से चिन्हित करके सिख नागरिकों के घरों को जलाया गया, 10,000 सिखों को मारा गया, सिख बहन बेटियों की इज़्ज़त को लूटा गया । तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी,सज्जन कुमार,जगदीश टाइटलर,कमलनाथ,एच के एल भगत,ललित माकन, धर्मदास शास्त्री जैसे बड़े नाम इसमे शामिल थे जिसके कई गवाह और सबूत भी है । राजीव गांधी ने खुद इस नरसंहार को जायज़ ठहराते हुए कहा कि "जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है । लेकिन आज तक किसी अदालत ने राजीव गांधी की तरफ कोई बयान नही दिया था लेकिन 17 दिसंबर का दिन ऐतिहासिक था । सज्जन कुमार के मामले में न बल्कि माननीय उच्च न्यायालय ने सज्जन कुमार को सजा सुनाई बल्कि राजीव गांधी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इस नरसंहार में राजनीतिक सरक्षंण हासिल था जिसके कारण ये हत्याएं हुई । माननीय राष्ट्रपति जी, पहली बार किसी अदालत ने देश के प्रधानमंत्री के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग किया है लेकिन ये देश के लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली बात है कि एक ऐसा व्यक्ति जिसे अदालत भी दोषी मानती है देश के सर्वोच्य पदक भारत रत्न से सुशोभित है । ऐसे हत्यारे व्यक्ति को भारत रत्न पदक, भारत रत्न पदक का अपमान है । अतः मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप राजीव गांधी का भारत रत्न वापिस लेने का आदेश दे ।
आपका आभारी
तजिंदर पाल सिंह बग्गा