सत्ता के लोभ में राजनीतिक दलों का गठबंधन ना हो

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मेरा मानना है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों का गठन अलग-अलग विचारधाराओं और अलग-अलग सिद्धान्तों के आधार पर होता है।हमारे देश मे कुल कितनी राजनीतिक दलों की संख्या है और उनके क्या नाम है हम जैसे साधारण जनता को पता तक नहीं है ,क्योंकि यहाँ पर हर  दिन एक नई दल का गठन होता है।जब सभी राजनीतिक दलों का विचारधारा अलग है, सिद्धान्त अलग है, नाम अलग है,चुनाव चिन्ह अलग है फिर ये सिर्फ सत्ता के लोभ में वोटरों की आकांक्षाओं और हितों को दरकिनार करके चुनाव से पुर्व या चुनाव के बाद आपस में गठबंधन कर लेती है ।जो कि जनता के साथ धोखा है अन्याय है ।राजनितिक दलों के इस कदम से वोटर अपने को ठगा महसूस करते हैं ।वोटरों में चुनाव के प्रति उदासिनता आती जा रहीं है।

अतः मेरा नम्र निवेदन है माननीय मुख्य चुनाव आयोग से कि ऐसे गठबंधन करने पर रोक लगायें, या फिर ऐसे राजनीतिक दलों की मान्यता समाप्त कर दें ।