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देश के शिक्षा बजट को बढ़ाया जाए #HarBachcheKoShiksha

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मेरा नाम बंदना है, मैं 16 साल की एक दलित लड़की हूँ, जिसका घर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले में पड़ता है। जब मैं 14 साल की थी तो मुझे दो में से कोई एक रास्ता चुनना था। या तो मैं स्कूल जाने का रास्ता चुन सकती थी, या स्कूल के समय मजदूरी कर के अपने गरीब परिवार की मदद करने का रास्ता। जैसा कि मेरे जैसी बहुत सी लड़कियों को करना पड़ता है, मैंने दूसरा रास्ता चुना।

मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे इतना शेयर करें कि आगे से देश को कोई बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहे।

मेरे गाँव में 8वीं कक्षा के बाद की पढ़ाई के लिए कोई सरकारी स्कूल नहीं है, मेरे जैसी बहुत सी लड़कियाँ या तो बाल-मजदूर बन जाती हैं या बाल-विवाह का शिकार। 

हम जैसे गरीब परिवार के पास इतना पैसा नहीं होता कि हम प्राइवेट स्कूल जा सकें। हमारे यहाँ लड़कियों के लिए शिक्षा प्राप्त करना और मुश्किल होता है। कई माता-पिता को लगता है कि लड़कियों को गाँव से दूर किसी स्कूल में भेजना खतरनाक हो सकता है क्योंकि उनके लिए सुरक्षित यातायात की सुविधा नहीं होती। गाँव से दूर बसे स्कूल जाने पर, रास्ते में कई लड़कियों के साथ छेड़छाड़ होती है।

हमारे देश में शिक्षा का अधिकार (राइट टू एजुकेसन) कानून के तहत केवल 14 साल तक के बच्चों के लिए ही मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है। एकबार हमने 8वीं कक्षा पास की, 14 साल के हुए नहीं कि शिक्षा का हमारा सपना टूट जाता है। मैं अकेली लड़की नहीं, मेरे जैसी 15-18 साल की 40% लड़कियों के लिए स्कूल जाना केवल एक सपना है।

ये सपना तभी पूरा होगा जब हमारी सरकार शिक्षा पर और ज्यादा पैसे खर्च करेगी। देश के हर गाँव में सेकेंडरी स्कूल खोलेगी।

मैं दो साल तक स्कूल नहीं जा पाई पर मैं खुशकिस्मत थी कि मुझे दूसरा मौका मिला। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से मेरा नाम दोबारा एक प्राइवेट स्कूल में लिखाया गया। उनके समझाने से ही मेरे परिवार ने मुझे स्कूल जाने की अनुमति दी।

पर अभी भी स्कूल का खर्च उठाने में हमारी जान निकल जाती है। आज भी स्कूल के बाद मुझे परिवार का हाथ बंटाने के लिए खेतों में काम करना पड़ता है, मजदूरी करनी पड़ती है। इसकी वजह से होमवर्क करने का टाइम ही नहीं मिलता। 

मैंने ये पेटीशन माननीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल जी और माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी के नाम शुरू की है। मेरी मांग है कि सरकारी शिक्षा का बजट बढ़ाया जाए ताकि देश के हर बच्चे को हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा मुफ्त में उपलब्ध हो सके। चलिए मिलकर मांग करें कि शिक्षा पर देश की जीडीपी का कम से कम 6% खर्च किया जाए। (ये बरसों से हमारे देश का सपना रहा है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी दोहराया गया है।)

मेरी पेटीशन साइन करें अगर आप ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ में विश्वास करते हैं।

हाल ही में मेरे गाँव और अन्य इलाकों में कोरोना के प्रभाव पर लेकर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश बच्चों को पता ही नहीं कि वो कब स्कूल वापस जा पाएंगे। लगभग 37% बच्चों ने अध्ययन के सवालों का जवाब नहीं दिया और कहा कि उन्हें पता नहीं, जो कि देश बच्चों की शिक्षा पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादलों का एक भयावह चित्रण है।

कोरोना को देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जेंडर इंक्लूजन फंड के प्रभावी इस्तेमाल से स्कूलों के दुबारा खुलने और बच्चों को दुबारा शिक्षा से जोड़ने का बड़ा कदम उठाया जा सकता।

अगर सरकार भारत की जीडीपी का 6% शिक्षा पर खर्च करेगी तो मेरे गाँव में और अन्य गाँवों में भी एक हाईस्कूल होगा। मेरी तरह हज़ारों-लाखों बच्चों को शिक्षा मिलेगी जिससे उनका और देश का भविष्य भी बेहतर हो सकेगा। ये बच्चे पढ़-लिखकर राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देंगे।

मेरे हस्ताक्षर अभियान का साथ देकर राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान दें।