सड़क सुरक्षित आगरा अभियान

0 वयाकत ने हसताकषर गये। 100 हसताकषर जुटें!


ऽ सड़क हादसों का शहर है आगरा
ऽ एनएच-2 पर आईएसबीटी के सामने 12 लोगों की मौतों की न्यायिक जांच हो और दोषी दण्डित हों।
ऽ आगरा की सड़कों का सुरक्षा आॅडिट हो।
ऽ शहर से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक हो।

अभी तक गंदे शहरों में आगरा शुमार था, लेकिन अब यह सड़क हादसों के लिए भी कुख्यात हो रहा है। कदाचित कोई दिन ही जाता होगा, जब सड़क हादसे समाचार पत्रों की सुर्खियाॅं न बनते हांे।

दिनांक 5.3.2017 को 12 घंटे में एनएच-2 पर आईएसबीटी के सामने एक ही जगह पर 12 लोगों की मौतों ने शहर के लोगों को दहला दिया है। अनेक घरों के चिराग को बुझा दिया है। इस संबंध में हम यह मांग करते हैं कि इसकी न्यायिक अथवा उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच के आदेश दिये जायें ताकि दोषी दण्डित हों और आगे इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में आगरा में 1062 हादसें हुए जिनमें मृतकों की संख्या 522 और घायलों की संख्या 811 थी।

आईआईटी (दिल्ली) द्वारा दिनांक 20.6.2014 को आगरा में Traffic Safety in Agra- A Report by Transportation Research & Injury Prevention Programme, IIT Delhi (June 2014) पर हुई कार्यशाला से यह तथ्य उजागर हुआ कि सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं के कारण आगरा शहर भारतवर्ष में सबसे अधिक दुर्घटनाओं वाला शहर है।


हमारा यह भी अनुरोध है कि आगरा की सड़कों का सुरक्षा आॅडिट भी यथाशीघ्र कराया जाये जिसके लिए एक तकनीकि जांच दल का गठन किया जाये जो रिपोर्ट दे कि आखिर सड़क यातायात के लिए आगरा इतना असुरक्षित क्यों है और क्या सड़क पर निरन्तर बढ़ रहे वाहन हादसों की संख्या को और अधिक बढ़ायेंगे? इस संबंध में जांच सेन्ट्रल रोड रिसर्च इन्स्टीट्यूट (सीआरआरआई) को दिया जाना भी उचित होगा।
यह भी उचित होगा कि आगरा शहर से भारी वाहनों न गुजरें और उसके लिए इनर रिंग रोड यथाशीघ्र पूरी हो तथा उत्तरी बाईपास का भी निर्माण हो।

अच्छी से अच्छी सड़क क्यों न हो, यातायात के उचित प्रबन्धन और यातायात नियमों के उचित रूप से लागू किये बिना हादसे होना स्वभाविक है।

शहर में सुरक्षित यातायात के लिए हमारे सुझाव:-

1. सड़क की पटरियाॅं होर्डिंग मुक्त हों- सड़कों की पटरी पर लगे बेतरतीव होर्डिंग पूरी तरह से हटायें जायें और विज्ञापन केवल यूनिपोल के माध्यम से अनुमन्य हो। पटरी पर लगे होर्डिंग पैदल यात्रियों के अधिकारों का अतिक्रमण है और उन्हें पटरी के स्थान पर सड़क पर चलने को मजबूर करते हैं जिससे वे तेज चलते वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।

2. कोई बिल्डिंग मटेरियल न रखा जाये- सड़कों व उनकी पटरियों पर कोई बिल्डिंग मटेरियल न रखने की अनुमति हो।

3. अतिक्रमण से मुक्त – सड़क की पटरियों को स्थाई व अस्थाई अतिक्रमणों से मुक्त रखा जाये।

4. ब्लैक स्पोटों का चिन्हांकन – ऐसे स्थल जहां प्रायः हादसे होते हैं उन्हें ‘‘ब्लैक स्पोट’’ के रूप में चिन्हित किया जाये और वहां के सड़क के डिजायन में सुधार किया जाये।

5. पर्याप्त ट्रेफिककर्मी – चैराहों पर ट्रेफिक कर्मियों की कमी रहती है जिससे वाहन चालक अपनी मनमर्जी से वाहन चलाते हैं जिससे प्रायः ट्रेफिक जाम व दुर्घटनाऐं हो जाती हैं। पर्याप्त संख्या में ट्रेफिककर्मियों का रहना आवश्यक है।

6. ट्रेफिक सिग्नल्स – प्रायः सभी चैराहों के ट्रेफिक सिग्नल्स खराब रहते हैं जिससे ट्रेफिक प्रबन्धन में कठिनाईयाॅं आती है।

7. प्रत्येक गंभीर हादसे की जांच – जब भी दो या दो से अधिक व्यक्ति मौत का शिकार हों तो उस हादसे की तकनीकि जांच एक सप्ताह के अंदर आनी चाहिए ताकि उसके कारणों का खुलासा हो सके।

8. गतिसीमा संकेतक – शहर की सड़कों पर अधिकतक गतिसीमा के कोई संकेतक नहीं है और न ही गतिसीमा उल्लघंन के लिए कभी किसी वाहन का चालान होता है। तेज गति से चलती हुई मोटर बाइक या कार हादसे का कारण बनती है।

9. जेबरा क्रोसिंग – पद यात्रियों को सड़क पार करने के लिए जेबरा क्राॅसिंग आवश्यक है किन्तु आगरा में ये नदारत है और जहां हैं, वे गलत ढ़ंग से चिन्हांकित हैं। जेबरा क्रॅासिंग के सामने सेंट्रल चैनल है।

10. मासिक बैठक- यातायात अधिकारियों, जिला प्रशासन व नागरिक संगठनों के साथ आवास बन्धु की तर्ज पर सड़क सुरक्षा बन्धु का गठन हो जिसकी मासिक बैठक में हादसों की स्थिति और कारणों पर नियमित विचार विमर्श हो सके और सुधार के उपाय अपनाऐं जा सकें।

11. नागरिक सक्रियता – नागरिक संगठन गतिशील हों ओर वाहन चालकों के मध्य जागरूकता उत्पन्न करें जिसके लिए समय-समय पर संगोष्ठियों का आयोजन भी कारगर हो सकता है।

12. नेशनल ट्रेफिक ट्रिब्यूनल का गठन हो – राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की तर्ज पर नेशनल ट्रेफिक ट्रिब्यूनल का गठन हो जहां यातायात से संबंधित मुद्दांे को ले जाया जा सके और उचित आदेश प्राप्त किये जा सकें। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा पहल की जाये।

13. चालान की राशि का उपयोग ट्रेफिक प्रबन्धन हेतु हो- ट्रेफिक नियमों के उल्लघंनकर्ताओं से जो पैसा चालान के रूप में प्राप्त हो, उसका उपयोग ट्रेफिक प्रबन्धन व व्यवस्था के लिए व्यय किया जाये और उसे आय का माध्यम न बनाया जाये।

14. यातायात नियमों का कड़ाई से पालन हो।
हमें आशा है कि आप हमारे उपर्युक्त सुझाव पर विचार कर उन्हें लागू करने के लिए यथाशीघ्र आदेश पारित करेंगे।



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