क्या जनसंख्या नियंत्रण कानून बनना चाहिए

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राष्ट्र निर्माण न्यास
Rashtra Nirman Trust

राष्ट्र निर्माण न्यास एक स्वयंसेवी संस्था है, जिसका उद्देश्य भारतवर्ष को विश्व पटल पर एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है जो सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विश्व का नेतृत्व कर सके, विश्व गुरु की भूमिका निभा सके।
इस संगठन के प्रमुख सुरेश चव्हाणके हैं जिन्होंने 'राष्ट्र सर्वप्रथम' के आदर्श को अपने प्रखर राष्ट्रवादी मिशन में समाहित कर अद्वितीय भारत के नवनिर्माण की कल्पना की है। वे 'हर हाथ को काम और हर काम को हाथ' के सूत्र पर चलकर समाज और राष्ट्र के सम्पूर्ण विकास में विभिन्न माध्यमों से योगदान दे रहे हैं।
राष्ट्र निर्माण संगठन भारतवासियों के खोए स्वाभिमान को जगाने और देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए कृतसंकल्प है। राष्ट्र निर्माण संगठन अपने सभी अभियानों को सुप्रचार, संस्कार, सामर्थ्य और स्वाभिमान के चार सूत्रों में पिरोकर राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना हेतु आधारभूमि तैयार करेगा ताकि एक स्वस्थ और सबल राष्ट्र की पुनर्स्थापना हो सके।

भारत बचाओ महा रथयात्रा क्या है ?
इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने हेतु सरकार को प्रेरित करना । समाज और राष्ट्र के विविध सरोकारों के साथ जनसंख्या नियंत्रण कानून हेतु जनचेतना का प्रसार करना । सुरक्षित एवं शैक्षिक परिवार नियोजन देश के हर एक जिम्मेदार नागरिक का अधिकार है। देश को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी सबकी बनती है। देश की आधी आबादी स्त्री शक्ति की है। अगर वे सशक्त हो जाएं तो देश जनसंख्या विस्फोट की समस्या से निकलकर सम्पूर्ण विकास के पथ पर आसानी से अग्रसर होगा।
राष्ट्र निर्माण ट्रस्ट के संस्थापक एवं मार्गदर्शक सुरेश चव्हाणके जी की भारत बचाओ महारथयात्रा सामाजिक-सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय सरोकार के मिशन और देश की एकता-अखंडता को समर्पित है। समाज के सज्जन शक्ति को सामर्थ देना हमारा प्रमुख उद्देश्य है।

 

 

यह अभियान क्यों ?

• हिंदुस्तान जनसांख्यिकी असंतुलन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। इसके कारण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक अशांति एवं अव्यवस्था की समस्या विकट होती जा रही है।
• देश के चहुमुंखी विकास, समृद्धि, प्रत्येक नागरिक की कुशलता और राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए एक समान जनसंख्या नीति और प्रभावी कानून जरूरी है।
• जनसंख्या असंतुलन और पर्यावरण का गहरा संबंध है। अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि, असंतुलन, जंगल की कटाई, जल एवं खाघान्न की कमी, भू-जैविक संसाधनों का ह्रास, स्वास्थ्य समस्याएं और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाएँ- ये सभी पर्यावरणीय एवं भू-पारिस्थितिकीय असंतुलन के लिए जिम्मेदार कारक हैं।

जनसंख्या नियंत्रण कानून क्यों ?
व्यक्ति , परिवार , समाज के सशक्तिकरण और देश के संपूर्ण विकास के लिए इस कानून की आवश्यकता है। यदि अनियंत्रित रूप से जनसंख्या विस्फोट जारी रहे तो कोई भी समाज और देश चाहे जितना विकास कर ले , उसकी बदहाली दूर नहीं हो पाएगी । जनसंख्या विस्फोट से गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण का गहरा संबंध है । तमाम कोशिशों के बावजूद मानव विकास सूची (Human Development Index) में
• भारत अभी भी श्रीलंका और मालदीव जैसे छोटे देशों से भी निचले स्तर पर 131 वें स्थान पर है।
• उभरती अर्थव्यवस्था के मामले में 74 देशों में 62 वें स्थान पर है
• स्वास्थ्य सूचकांक के मामले में 195 देशों में 154 वें स्थान पर है
• शिक्षा सूचकांक में 145 देशों में 92 वें स्थान पर नेपाल, युगांडा और मालदीव जैसे छोटे देशों से भी नीचे है।
जनसंख्या की यह वृद्धि दर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक विषमता, अशिक्षा, कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं की जननी है। आबादी की बढ़ती यह दर कभी भी भारत को विकसित देशों की श्रेणी में नहीं आने देगी।
इसलिए सभी नागरिकों के लिए चाहे वह किसी भी क्षेत्र , समुदाय , जाति-संस्कृति से सम्बंधित हों एक समान जनसंख्या नीति की सख़्त जरूरत है। विषेशज्ञों , नीति-निर्धारकों का कहना उचित है कि एक जनसंख्या नीति सामाजिक नीति से कम नहीं होती।
यह देश की जरूरत है कि भारत सरकार संविधान की प्रस्तावना में दर्ज समानता और समाजवाद के उद्देश्यों के लिए राष्ट्रीय हित में समान जनसंख्या नीति लागू करे।
भारत दुनिया का पहला ऐसा देश था , जिसने 1952 में जनसंख्या नियंत्रण के उपायों की घोषणा की थी। इसमें सीमित परिवार के दर्शन को महत्व प्रदान किया गया।
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राजग सरकार ने वर्ष 2000 में एक समग्र जनसंख्या नीति के निर्माण के लिए जनसंख्या आयोग का गठन किया। इस नीति का प्रमुख उद्देश्य 2. 1 की सकल प्रजनन दर की आदर्श स्थिति को 2045 तक प्राप्त कर स्थिर व स्वस्थ जनसंख्या के लक्ष्य को प्राप्त करना था।
अगर जनसंख्या विस्फोट पर काबू नहीं पाया गया तो 2026 तक करीब 40-50 करोड़ अतिरिक्त जनसंख्या का दबाव हमारे सीमित संसाधनों पर बढ़ जाएगा।

अब आप भी सोचे ।

 



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