भारत के स्वास्थ्य बजट को बढ़ाकर जीडीपी का 10% करें

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प्रिय वित्त मंत्री जी,

मैं एक ईएनटी सर्जन हूं और विभिन्न निजी अस्पतालों में काम करते हुए मैंने दशकों बिताए हैं।

अपने 18 साल की प्रैक्टिस के अनुभव में मैंने बहुत करीब से देखा है कि कैसे भारत के लोग पैसों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण ज़िंदगी से हार जाते हैं। जिनके पास हेल्थ इंश्योरेंस है वो बड़े अस्पतालों में इलाज करा लेते हैं, जिनके पास नहीं वो सरकारी अस्पतालों के गलियारों में इलाज का इंतेज़ार करते रहते हैं।

देश में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास प्राइवेट क्या सरकारी अस्पताल में इलाज का पैसा नहीं होता। ऐसे लोगों की संख्या लाखों-करोड़ों में है। 

कोरोना वायरस की इस वैश्विक महामारी ने स्वास्थ्य को हर घर में चर्चा का विषय बना दिया है। मेरी समझ से देश में मौजूद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के आकलन का इससे बड़ा कोई अवसर नहीं होगा। हम संक्रमण के मामले में दूसरे नंबर पर हैं, आए दिन हज़ारों निर्दोष भारतीय अपनी जान गँवा रहे हैं। 

ये लोग केवल एक संख्या तो नहीं हैं, ये किसी के माँ-बाप हैं, किसी के बच्चे हैं, और सबसे बड़ी बात कि ये भारत के एक नागरिक हैं। अगर इन नागरिकों की मौत भी हमारे सिस्टम को नहीं जगा पाई तो ये देश और देशवासियों का बहुत बड़ा दुर्भाग्य होगा।

जैसा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा भी है, चलिए इस “आपदा को अवसर” में बदलें और भारत के आगामी बजट में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च राशि को बढ़ाने का काम करें।

मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि भारत का स्वास्थ्य बजट बढ़ाया जाए।

आप जानते हैं हमारी सरकार सालाना बजट का केवल 1.3% स्वास्थ्य पर खर्च करती है, यह बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों से भी कम है।

2020-21 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य के लिए 69,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इस हिसाब से 135 करोड़ भारतीयों के स्वास्थ्य पर सालाना केवल 511 रुपये खर्च किए गए। क्या ये हमारे साथ नाइंसाफी नहीं है?

कई राज्यों में स्वास्थ्य सेवाएं इतनी खराब हैं कि एंबुलेंस आने से पहले मौत आ जाती है। स्वास्थ्य सिस्टम को बदलने की आवश्यकता है।।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट-ग्रेजुएट सीटों की संख्या हर साल बढ़ाने की जरूरत है। हर गली और मोहल्ले को पूरा करने के लिए बेहतर नर्सिंग शिक्षा, पैरामेडिक्स और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता प्रशिक्षण होना चाहिए। आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को उनके द्वारा किए जाने वाले प्रयासों के लिए बेहतर मज़दूरी मिलनी चाहिए।

हमें हर छोटे-बड़े शहर के हर अस्पताल में काम करने वाला आईसीयू, एनआईसीयू, वेंटिलेटर और ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध कराना होगा। हम सरकार से आगामी बजट में स्वास्थ्य सेवा पर खर्च को जीडीपी के 10% तक बढ़ाने की मांग करते हैं I 

इस साल ने हमें सिखाया है कि स्वास्थ्य से अधिक महत्वपूर्ण कुछ नहीं है, आइए हम सब मिलकर संकल्प लें कि भारत की आने वाली पीढ़ी को बीमारियों से, महामारियों से लड़ने के लिए सशक्त बनाएँगे। इसकी शुरुआत हर भारतीय के स्वास्थ्य पर ज़्यादा पैसे खर्च करने सो होगी।

मेरी पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें ताकि भारत के स्वास्थ्य बजट को 1.3% से 10% किया जा सके।

#DusKaDum

डॉ सारिका वर्मा

ईएनटी सर्जन, गुड़गाँव