रोहिंग्या मुस्लिम वापिसी अभियान

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केंद्र सरकार ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिम अवैध प्रवासी हैं और इसलिए कानून के मुताबिक उन्हें बाहर किया जाना चाहिए। गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने इस मसले पर कहा, "कोई भी भारत को ह्यूमन राइट्स और शरणार्थियों की सुरक्षा के बारे में नहीं सिखा सकता है।" बता दें कि भारत से रोहिंग्या लोगों को बाहर किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की गई है और इसे संविधान के दिए अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।

25 अगस्त को रोहिंग्या घुसपैठियों ने म्यांमार में पुलिस पोस्ट पर हमला किया। इसके बाद सिक्युरिटी फोर्सेस ने ऑपरेशन शुरू किया। रोहिंग्या घुसपैठियों और म्यांमार की सिक्युरिटी फोर्सेस एक-दूसरे पर अत्याचार करने का आरोप लगा रहे हैं। बर्मा ह्यूमन राइट नेटवर्क का कहना है कि इस अत्याचार के पीछे सरकार, देश के बुद्धिस्थ मोंक में शामिल तत्व और अल्ट्रा नेशनलिस्ट सिविलियन ग्रुप्स का हाथ है।

बर्मा से आए रोहिंग्या मुस्लिम दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर शरण देने की मांग कर रहे हैं। वहीं, सरकार ने देश में अवैध रूप से मौजूद 40 हजार से अधिक रोहिंग्या लोगों को वापस उनके देश म्यांमार भेजने की प्रॉसेस शुरू की है। इसी बीच, मोदी म्यांमार दौरे पर पहुंच चुके हैं। म्यांमार की आर्मी की कथित ज्यादतियों के चलते रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत और बांग्लादेश जैसे देशों मेें शरण लेनी पड़ी। रोहिंग्या जम्मू, हैदराबाद, हरियाणा, यूपी, दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों की तरफ से दायर एक पिटीशन में मो. सलीमुल्लाह और मो. शाकिर ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिमों का प्रस्तावित निष्कासन संविधान आर्टिकल 14(समानता का अधिकार) और आर्टिकल 21 (जीवन और निजी स्वतंत्रता का अधिकार) के खिलाफ है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 11 सितंबर को होनी है।



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