जनहितकारी व्यवस्था की स्थापना

0 व्यक्ति ने हसताकषर गये। 100 हसताकषर जुटाएं!


हमारे देश में लोकतंत्र होने के बावजूद शासन व्यवस्था से "लोक" गायब है और "तंत्र" का बोलबाला है। इस व्यवस्था को बदलना आवश्यक है ताकि लोकतंत्र सही अर्थों में "जनहितकारी" हो। आज सोशल मीडिया पर यह मज़ाक आम है कि चुनाव दो चरणों में होते हैं, पहले नेता आपके चरणों में होते हैं और फिर जनता, नेताओं के चरणों में होती है। इसे बदलने के लिए आवश्यक है कि जनता का सशक्तिकरण हो। यह पांच चरणों में संभव है :

1.  सरकारी फैसलों में मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित हो। सरकार का कोई भी नया फैसला होने से पहले उसे नागरिक समाज में प्रचारित किया जाए और जनता की राय ली जाए। कोई भी नया फैसला जनता की राय और सहमति से ही लागू हो।

2.  नागरिक समाज यदि कोई कानून बनावाना चाहे तो शहर, राज्य अथवा केंद्र के जनप्रतिनिधियों को वह कानून बनाना ही पड़े।

3.  सभी सरकारी अधिकारियों को अपना हर काम निश्चित समय-सीमा में खत्म करने की व्यवस्था हो।

4.  भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए शत-प्रतिशत ई-गवर्नेंस लागू हो।

5.  इंटरनेट व ई-गर्वनेंस से अनभिज्ञ नागरिकों की सहायता के लिए विशेष सेल की स्थापना की जाए।

ये पांचों चरण बहुत साधारण हैं, इन्हें लागू करने के लिए नियमों में किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है, पर इससे आम नागरिकों का जीवन आसान हो जाएगा, नेताओं और अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगेगी और भ्रष्टाचार खत्म होने की दिशा में पहला मजबूत कदम उठेगा। दिखने में इन साधारण पांच कदमों का असर दूरगामी होगा जो हमारे लोकतंत्र को मजबूत करेगा और लोककल्याणकारी बनाएगा।

तो आइये, कृपया इस आवेदन पर अपनी सहमति दीजिए। इस पेटिशन का राजनीति से या किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। इसका संबंध हमारे देश से है, हमारे देशवासियों से है और हमारे देश की व्यवस्था से है।

आइये, हम मिलकर आवाज़ उठायें ताकि हमारी आवाज़ सुनी जाए और लगातार सुनी जाए।

धन्यवाद।

पी. के. खुराना