बनारस की पहचान बचाएं...लाखों बुनकरों को उनका हक दिलायें

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कल तक बनारस की जो गलियाँ पॉवरलूम की आवाज़ों से गुलज़ार रहती थीं, वहाँ अब सन्नाटे ने पैर पसार लिया है। कोरोना और लोकडाउन की मंदी ने पहले ही लाखों बुनकरों की कमर तोड़ दी थी, उसी पर बुनकरों को मिलने वाली बिजली कि सब्सिडी को मौजूदा सरकार ने ख़त्म करने का ऐलान क्या किया की बेबसी और लाचारी ने बुनकरों को मुंह चिढ़ाना शुरू कर दिया।

आज उत्तर प्रदेश का बुनकर जो अपने हुनर पर कभी विश्व की वाहवाही लूटा करता था वो अब अपने इसी हुनर को लेकर खुद को बदनसीब समझने लगा है।

नतीजा तो अब ये है कि जो लोग कभी बनारसी साड़ी बनाकर देश का गौरव बढ़ाते थे, वो आज अपनी मशीनों को किलो के भाव बेचने के बाद मिलने वाले पैसे से सड़कों पर फल और सब्जी बेचने पर मजबूर हो चुके हैं। अगर सरकार ने लाखों बुनकरों की मदद नहीं कि तो जल्द ही बनारस की पहचान कहा जाने वाला ये उद्योग पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

हमारी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि बनारस के साथ साथ पूरे उत्तर प्रदेश के वस्त्र से जुड़े लोगों की पहचान को बर्बाद होने से बचाया जा सके। हमारी सरकार से केवल एक ही मांग है:

-बुनकरों को फ्लैट रेट पर बिजली मुहैया कराई जाए

जिन्हें फ्लैट रेट के बारे में नहीं पता उन्हें बता दें कि साल 2006 से बुनकरों और इससे जुड़े लोगों के उद्धार के लिए सरकार ने बुनकरों से प्रति लूम 72 रु/माह लेने की योजना बनाई थी

बुनकर सरकार का हर संभव सहयोग कर रहे हैं, पर सरकार हमसे वादा कर के भी नहीं निभा रही है। सरकार को पूरा हक है कि फ्लैट रेट अगर पहले के मुकाबले कम है तो उसे बढ़ा लें। जिसका भुगतान हम करने के लिए तैयार हैं। लेकिन फ्लैट रेट की योजना को खत्म न किया जाए।

हमने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया, ताली-थाली बजाकर सरकार तक अपनी बात पहुँचाने का काम किया। अधिकारी और मंत्री तक ज्ञापन भी पहुँचाया लेकिन अभी भी इस गंभीर मुद्दे पर, जिससे बनारस और यूपी के लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी जुड़ी है, उसपर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।

आप सबसे अनुरोध है कि हमारी पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें ताकि संदेश जाए कि बुनकर समाज अकेला नहीं, देश के लोग इस तकलीफ़ की घड़ी में उनके साथ खड़े हैं।

हम आशा करते हैं कि सरकार बुनकरों के हितों को देखते हुए जल्द ही फ्लैट रेट पर बिजली देने का फैसला लेगी।

#VocalForLocal #BunkarSubsidy