यातायात चालान राशि मे अप्रत्याशित वृद्धि

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यातायात के चालान में बेहताशा वृद्धि की गई, ये मानकर कि लोगों की driving में सुधार होगा । चलो मान लिया ।

होना तो यह भी चाहिए:-

खराब सिग्नल... संबंधित जिम्मेदार अधिकारी, जुर्माना 10000/-
सड़क पर गड्ढ़े और पानी... संबंधित जिम्मेदार अधिकारी जुर्माना 20000/-
अतिक्रमित फुटपाथ... संबंधित जिम्मेदार अधिकारी जुर्माना 20000/-
सड़क पर रोशनी नहीं...
जिम्मेदार JEn, जुरमाना 25000/-
सड़क पर कचरा बह रहा है...संबधित जिम्मेदार अधिकारी, जुर्माना 25000/
सड़कों पर लाइट के खंभे नहीं... संबंधित जिम्मेदार अधिकारी, जुर्माना 30000/-

खुदी सड़क कोई मरम्मत नहीं... संबंधित जिम्मेदार अधिकारी, जुर्माना 50000/-

गड्ढों में गिर कर आप गिरो चोटिल हो जाएँ...संबंधित जिम्मेदार अधिकारी, जुर्माना =दवा का पूरा खर्चा +5000/-रोज(जब तक ठीक ना हो)

आवारा गायें जानवर टकरा जाए कुत्ता काट ले... संबंधित अधिकारी जिम्मेदार..

क्या भारत के निवासियों को सिर्फ जुर्माना और टैक्स भरने की ही जिम्मेदारी है ? क्या उनको अच्छे वातावरण में जीने का हक नहीं ? सरकारी तंत्र में लापरवाही और अनियमितता कब तक चलेगी, इसमें सुधार क्यों नहीं कराया जा रहा? आज तक सरकारें सिर्फ मनमानी ही करती आई हैं, कम से कम वर्तमान सरकार को तो सरकारी तंत्र में सुधार करने के प्रयास करके सुधार करना चाहिए, अब तक यही देखने में आता है कि गलती सरकारी कर्मचारी/अधिकारी की नहीं होती, जनता की होती है । आशा है कि सुधार किया जाएगा ।

हनु का कमेंट्स हो जाये फिर आगे संसद में प्रस्ताव भजते है�☺