निजी स्कूलों की लूटमार शिक्षा प्रणाली पर लगाम लगे

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माननीय प्रधानमंत्री जी,

दिन प्रतिदिन निजी स्कूलों की बढ़ती फ़ीस, कमिशन पद्धति, अपने यहाँ से ही सब कुछ ख़रीदने की बाध्यता ने शिक्षा को सिर्फ़ एक व्यापार बना दिया है फ़ीस के एवज़ में शिक्षा का स्तर भी बिलकुल निम्न हो गया है 

मेरा निवेदन है कि इनकी कार्य प्रणाली का मूल्याँकन हो और  एक ग़रीब वर्ग का व्यक्ति भी अपने बच्चे को सही शिक्षा मुहैया करा सके़ , बिना पढ़ाई के वर्तमान में बढ़ती जनसंख्या एक बोझ समान होगी । इतना ही नही हमारी ना तो सरकारी शिक्षा प्रणाली बेहतर है और निजी गलाकाट प्रतिस्पर्धा में व्यस्त है एेसे में स्थिति बच्चों को बेरोज़गारी व पढ़ाई से दूर ले जा कर उनके भविष्य को निम्न बना रही है। मेरा एक सुझाव है कि सभी निजी विधालयो के लिए एक मानदण्ड बनाया जाये कि इस कक्षा से इस कक्षा की फ़ीस इतनी होगी।ड्रेस , पढ़ाई के लिए केवल एनसीएआरटी की पुस्तक ही मान्य हो, कोइ साइड बुक ना लगाइ जाये।अगर ज़रूरी ही है तो कोई एक दो साइड बुक ही हो हर NCERT की साइड बुक नहीं, कोपी किताब कही से भी ख़रीद सके,वग़ैरह  की कोई एक दुकान से ख़रीदने की बाध्यता ना हो।

मोदी जी जब तक बेहतर शिक्षा सबकी पहुँच तक नहीं होगी तब तक शिक्षित भारत का सपना केवल सपना ही होगा। मेरा आपसे निवेदन है कि इस मुद्दे पर आप कोई बेहतर क़दम उठाये।

धन्यवाद ।



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