आरक्षण :- जातिगत से आर्थिक

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आज कल हम जैसा की देख रहे है कि जातिगत आराक्षण एक गम्भीर समस्या बनती जा रही है, हमारे नेता लोग इसका भरपूर फायदा उठा रहे है, क्योंकि वो लोग की हमलोगों को एक भिन्न भिन्न जाती में बाँट के रखी हुई है, आरक्षण का लाभ उन्हें मिलना चाइये जो गरीब हो अब मायावती, लालू के पुत्र, रामविलाश पासवान के पुत्र, जीतनराम मांझी के पुत्र इन लोगों को तो बच्चे से सब कुछ का लाभ मिल रहा है ये पढ़ने लिखने में सक्षम थे इनके पास पैसे और संसाधन की कमी भी नहीं थी तो फिर इन्हें आरक्षण क्यों??? कई ऐसे सवर्ण समाज के लोग भी हैं जो बहुत गरीब है उनके पास ना तो जमीन है खेती के लिए और ना ही पढाई के लिए पैसा,

हम आप लोगों से यही प्रार्थना करते हैं कि हमलोग नेता लोगों के कारण अपनी समाज को गन्दा ना करें बल्कि आपस में मिलकर उनकी जातिगत विचारधारा में बदलाब लाये और हमलोग सब मिलकर जातिगत आरक्षण को समाप्त करके आर्थिक आधार करने की माँग करें जिससे समाज में सभी गरीब लोगों की भलाई हो ना की कुछ अलग विचारधारा के नेता लोगों का।