प्रणामी धर्म की गंगा कही जाने वाली "किलकिला नदी" फिर से निर्मल और स्वच्छ हो !

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जेसे गंगा नदी का महत्व हे वेसे प्रणामी धर्म में मध्यप्रदेश के पन्ना जीले की नदी "किलकिला" जिसे प्रणामी धर्म की गंगा कहा जाता हे आजकल गंगा नदी की तरह दूषित हो गई हे समाचार माध्यमो से पता चल हे की इसका जल आचमन तो छोडो छूने लायक भी नहीं ,इतना प्रदूषित हो चूका हे !

यह नदी देश और दुनिया में फैले प्रणामी संप्रदाय की 'गंगा' कही जाती है।प्रणामी संप्रदाय के लोग किलकिला नदी का जल बर्तन (पात्र) में अपने साथ ठीक उसी श्रद्घा और भाव से ले जाते है, जैसे सनातन संप्रदाय के लोग गंगा जल को लाते हैं। इसका महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि प्रणामी संप्रदाय के व्यक्ति का अंतिम संस्कार कहीं भी हो, लेकिन उसके अवशेषों को नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम में दफनाया जाता है।

यह नदी जहां प्रणामी संप्रदाय की आस्था का केंद्र है, वहीं इससे पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के बफर जोन में वन्य प्राणियों की प्यास बुझती है।ये दूषित पानी उनके स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हे।

एनजीटी के आदेशों का भी हो रहा उल्लंघन.

एनजीटी के स्पष्ट आदेश हैं कि सीवर के पानी से सिंचाई कर सब्जियां न उगाई जाए। इस संबध में प्रदेश सरकार को भी एनजीटी में आदेशित करते हुए कहा था कि प्रदेश में कहां-कहां सीवर के पानी से सब्जियों का उत्पादन किया जाता है, इसका पता लगाया जाए। सीवर के पानी से उगाई जाने वाली सब्जियां लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। एनजीटी ने इस प्रकार से उगाई जा रही सब्जियों में रोक लगाने के निर्देश दिये थे व उगाई हुई सब्जियों को भी नष्ट करने की बात कही थीं लेकिन पन्ना नगर में इन आदेशों का कोई परिपालन नहीं किया जा रहा है।

सब को मिलकर इस पवित्र नदी को फिर से निर्मल और स्वच्छ करना चाहिए !

 



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