हिमाचल,किन्नौर ओर तबाही

0 वयाकत ने हसताकषर गये। 200 हसताकषर जुटें!


हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में सतलुज नदी पर अत्यधिक पनविद्युत प्रोजेक्ट कार्यरत है जिनमें अधिकतर प्रोजेक्ट टनल के अंदर बनाये गए है पहाड़ियों को काटकर या पहाड़ के अदर सुरंग बनाकर तैयार किये गए है । यह क्षेत्र हिमालय पर्वत का हिस्सा है और ग्लेशियर के बिलकुल नजदीक है जिस कारण पर्यावरण को अत्यधिक खतरा है।यदि आप वर्तमान समय में रामपुर से रिकोंगपियो का सफ़र राष्ट्रीय राजमार्ग से करेंगे तो किन्नौर के प्रवेश द्वार में दाखिल होते ही स्थिति खुद व् खुद आपके समक्ष आ जायेगी ।एक तरफ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लटके बड़े बड़े शिलाखण्ड ओर चटाने आपको मौत का नजदीक से एहसास करवाएगी तो दूसरी ओर पॉवर  प्रोजेक्ट के लिए  राष्ट्रीय राजमार्ग पर खुदाई का कार्य आपको तस्वीर साफ़ कर देगा । इन सब में जो सब से भयानक पहलु है वो है राष्ट्रीय राजमार्ग से बिल्कुल नीचे और साथ साथ बह रही सतलुज जो पूरी तरह से मलबे के ढेर में बदल गयी है ओर अपने प्राकृतिक प्रवाह को छोड़ दायें से सँकरी नालियां बनाकर प्रवाहित हो रही है।सतलुज जिसकी गणना सनातन धर्म में भी की है ओर इस नदी को हिन्दू धर्म में गंगा नदी के समान ही पवित्र मानी गई है आज अपने वजूद के लिए तरस रही है।अगर हम इस संदर्भ में गंगा नदी की बात करें तो गंगा नदी को हाल ही में जीवित अधिकार प्रदान कर उत्तरांचल के माननीय उच्च न्यायलय ने एक नया जीवन प्रदान किया है पर दुर्भाग्यवश हिमाचल में सतलुज आज अपने वजूद के लिए तरह गयी है।सतलुज जिससे ना सिर्फ हिमाचल में पीने के पानी की कई परियोजनाएं जुडी है बल्कि पंजाब के लिए तो जीवन का मुख्या आधार ही सतलुज नदी है ।सतलुज नदी वर्तमान समय में कुल छोटी बड़ी 30 से 1000 परियोजनाए चलाई जा रही है जिसके कारण सतलुज नदी का वास्तविक स्वरुप बदल गया है अगर समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में सारी मानव जाती को भयंकर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।



आज — Anil आप पर भरोसा कर रहे हैं

Anil Adv से "पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार: हिमाचल,किन्नौर ओर तबाही" के साथ आपकी सहायता की आवश्यकता है। Anil और 126 और समर्थक आज से जुड़ें।