गिरनार जी ,

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जैन धर्म में नेमीनाथ भगवान ने सिधतव की प्राप्ति गिरनार जी से होगी है।पर आज वो ऐसे हातो में है जो हमारे पवित्र क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। अगर हम मून रहेंगे  तो हमारा क्षेत्र  हम कहो देंगे।

कोर्ट में अपील भी की गई और इससे पहले ही उन लोगो ने अपने जूते दस्तावेज बनवा लिए ।

अगर आज हर जैन समाज का व्यक्ति जाग्रत नहीं होआ तो हम एक सिध क्षेत्रा को हमेशा के लिए कहो देंगे ।जहां उन लोगो ने एक  जैन मुनि की मृत्यु कर दी सोचो वो कितने पापी होंगे । मेरी आपसे विंट है हम फेले ही मिनोरिटी मै तो आ ही चोक है अब अपने मंदिर,धर्मस्थल को तो ना खोए।

इसे कई जिनवाणी व पुस्तके है जो प्रमाण देते है कि १००साल्फेले पचवी टूक पर जैन समाज वह पूजा ,पाठ करता था ,अभिषेक करता था।

बात गंभीर है ।जोड़िए मेरे साथ ,और बोलांड करे आवाज की हम जीत जाय।

एक और प्राथना है

जितना हो सके माला फेरे

ये भूल  जाय कि हम स्वेतंबर है या दिगंबर बस य ध्यान रखे हम जाने है।

कुछ समय के लिए सिर्फ अपने तीर्थो के लिए भोल जाय कि हमारा नाम क्या है बस याद रखे हम जैन है।पवित्र आत्मा है।

कृपया इस विषम हालत पर भी अपना रुख करे ।क्योंकि अगर आज हम कुछ नहीं करते तो याद रखेगा हम एक एक कर कर अपना सब कुछ खो देंगे।

जो सही वो आप तक पहंचा रही हूं।आशा करती हूं अप मेरे बात समझे गए।भोट सारे मत मिलेंगे पर जैसा मैने कहा हमें  जैन बनाना है।

जितना हो सके अपने पुण्य कि बडे ताकि आगे जब हम गिरनार जी को स्वतंत्र कर सके।

कृपया इस पर विशेष दृष्टि डाले और अपने ग्रंथो का अध्यन कर पुण्य बड़ावे।

है जिनेन्द्र,

धन्यवाद