शक्तिशाली पुलिस!

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आज ही एक घटना राजस्थान के समाचार पत्रो में पढ़ने को मिली, कुछ हार्डकोर बदमाश जिनके पास आधुनिक AK-47 जैसे हथियार थे, A ग्रेड की नाकाबंदी तोड़ कर भाग गए और 2 पुलिसकर्मियों पर फायर भी किये जिसमे एक शहीद हो गया और दूसरा पुलिसकर्मी अभी ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रहा है। हत्यारे फरार हैं। ये सिर्फ आज की घटना है, ऐसी घटनाये होना आजकल आम हो गया है, पुलिस शांति और सेवा के लिए बनी है, और ये घटना पुलिस की लाचारी की साफ़ झलक दिखाती है कि वो किस हद तक अपराधी को रोकने में असमर्थ होते जा रहे है। पुलिस ने उन पर एक राउंड भी फायर नही किया, ना ही कोई जवाबी कार्यवाही हुई, वजह साफ़ है, हमारी पुलिस के पास जो हथियार है उनसे बढ़िया किसी निम्न दर्जे के बदमाश लिए घूमते है, मसलन एक सामान्य कांस्टेबल के पास सिर्फ एक डंडा होता है जबकि बदमाशो की जेब में देशी कट्टा होना आम है। आज पुलिस के पास स्टॉक में जो हथियार है उनमे प्रमुख है, 303, एसएलआर, इंसास, 9mm पिस्टल और डंडे। अगर गौदामो में पड़े इन हथियारों की जाँच की जाये तो पता चलेगा कि 70 फीसद हथियार वक़्त की मार झेल झेल कर नाकारा हो चुके हैं। अब ये सिर्फ हाथो की शोभा बढ़ाते हैं। इनके आधुनिकरण का सरकार को कोई ख्याल ही नही आता? जितने शातिर बदमाश है, उनका मुकाबला इन खटारा हथियारों और खराब शैलियों से नही किया जा सकता। इस से आगे भी एक समस्या है, पुलिस के सामान्य कांस्टेबल के पास अगर हथियार आ भी गए तो भी क्या होना है? "गोली चलाने के आदेश' तो लेने ही पड़ेंगे ऊपर अधिकारियो से! क्या ये जरूरी नही कि बदमाशो से लड़ने को पहले से पुलिस के पास बढ़िया हथियार और टक्कर का मुकाबला करने के आदेश हो? अगर पुलिस को अपनी छवि आम आदमी में बनानी है और सख्ती से अपराधो पर लगाम लगानी है तो बदलाव तो करने ही पड़ेंगे, कल सम्भलेंगे तो कहीं देर ना हो जाये, इसलिए आज ही ये करना बेहतर होगा। जय हिन्द!


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