वर्तमान भावी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव

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किसी देश का विकास शिक्षा के विकास के बगैर संभव नही है लेकिन हमारे देश भारत मे शिक्षा के स्तर को काफी हद तक गिरा दिया गया है जिससे भारत का और भारत के लोगों का सामाजिक, मानसिक ,आर्थिक एवं राजनैतिक विकास सम्भव ही नही है।

आज भारत मे परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पूर्ण रूप से जानबूझकर का ध्वस्त कर दी गई है जिसमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड ,छत्तीसगढ़ जैसे राज्य शामिल हैं जिसके चलते इन प्रदेशों की बहुसंख्यक आबादी के बच्चों को उचित शिक्षा नही मिल पा रही है ,इतना ही नही परिषदीय शिक्षा के अलावां उच्च वर्ग के शैक्षणिक व्यवस्था को पूर्ण रूप  बदहाल करके रखा गया है जंहा से पढ़ कर निकलने वाले छात्र निराधार डिग्री हासिल कर अपने आप को पढ़ा लिखा मान रहे हैं।

बदलते भारत के दृश्य को देखकर भारत की पुरानी एवं जर्जर शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने की अत्यंत आवश्यकता है ।

इसके लिए जरूरी है कि सरकार समस्त सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सबसे पहले यह तय करे कि वह अपने बजट का 10 वां हिस्सा शिक्षा पर खर्च करेगी।

परिषदीय विद्यालयों में छात्र के अनुपात शिक्षकों की तैनाती की जाए।

पूरे देश मे एक समान शिक्षा देने के लिए नई शिक्षा नीति में इसकी घोषणा की जाए कि देश के गरीब ,असहाय वर्ग से लेकर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के बच्चे एक समान विद्यालय में एक समान शिक्षा ग्रहण करेंगे।।

यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सरकार द्वारा ठोस कदम उठाया जाता है तो देश के नागरिकों को समता, स्वतंत्रता एवं बंधुता देने की बात करना बेमानी होगा।

 

विश्वपति वर्मा,बस्ती, उत्तर प्रदेश



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