Manmohan Verma Social Activism

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किसान की पैदावार से देशवासियों का सिर्फ पेट ही नहीं भरता अपितु देश हित में विदेशी मुद्रा का संचय भी होता है। माना जाए तो ईश्वर के बाद किसान का दूसरा नंबर आता है क्योंकि यह हमारे अन्नदाता हैं। सर्दी गर्मी बरसात सहित मौसम तथा प्राकृतिक आपदाओं को झैलते हुए बड़ी मेहनत व संकट झेलते हुए यह किसान फसलों का निर्माण कर देशवासियों का पेट के लिए जीवनदायिनी कार्य करते हैं।

सोशल मीडिया व टीवी माध्यमों के द्वारा देखा जा रहा है कि इनकी मांगो पर सरकार द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया। मजबूरन किसानों को अपना घर बार छोड़ कर सड़कों पर आना पड़ा। धरना-प्रदर्शन के लिए दिल्ली आने पर उनके रास्ते मैं भारी वजनी पत्थर, कंक्रीट के रोड ब्रेकर, लोहे के कंटीले जाल व सड़के तोड़कर गहरी खाई ही नहीं बनाई अपितु शर्मसार कर देने वाली बात यह  कि इस कंपकपाती सर्दी में ठंडे पानी की बौछार ऊपर से आंसू गैस दाग कर उन पर अमानवीय अत्याचार किया गया। जैसे यह लोग देश के किसान ना होकर कोई आतंकवादी हैं। किसानों की मानवतावादी सोच भी देखिए की जिन पुलिस के हाथों चोटिल व घायल हुए उन्ही पुलिस वालों को बड़े आदर के साथ  प्यासे को पानी व भोजन भी करा रहे हैं।

*सरकार के पिछले समय में लिए गए कुछ फैसले एवं भरोसों से देश की जनता का कोई खास भला नहीं हो पाया है। इसलिए देशवासियों का धीरे-धीरे भरोसा वर्तमान सरकार की नीतियों एवं उनके द्वारा दिए जा रहे आश्वासनों से भंग होता जा रहा है। सरकार की दमनकारी नीतियां उजागर हो रही है। सरकार मे बैठे अनेको की आवाज को कुचलाने का नतीजन यह किसान आंदोलन जिसके द्वारा नए कानून का पुरजोर विरोध सामने आ रहा है।*

किसानों को ही नहीं अपितु साधारण नागरिक को भी यह समाझ आ रहा है कि पूंजीपतियों द्वारा इस कानून से देश के अन्दाताओं का अहित ही नहीं होगा अपितु आत्महत्या के कगार पर पहुंचना पड़ेगा। नए कानून के द्वारा पूंजीपति अपनी मर्जी का दबाव बनाकर मनचाही फसल ऊगवा कर मनमर्जी दामो पर खरीद करके अनैतिक भारी भंडारण कर मनमानी भारी कीमतों पर माल को बेचेगा। अंधाधुंध भारी मुनाफा कमाकर सिर्फ अपनी जेब भरेगा। अब सोचने वाली बात यह है कि इस कारण देश में भारी महंगाई पर अंकुश लगाना बड़ा ही नामुमकिन हो जाएगा। अपितु सरकार का वह गल्ला जो वह गरीब देशवासी के हिस्से का रखकर राशन की दुकानों द्वारा सस्ते मे बंटवाती है। उस मे भी अडचन व घपलेबाजी होगी। इस कारण देखा जाए तो इस नए कानून के द्वारा किसानों का ही नहीं अपितु पूरे देशवासियों सहित देश का भी अहित छिपा हुआ है। पूंजीपतियों के दोनों हाथों में लड्डू और सर कढ़ाई मैं साफ साफ नजर आता है। किसानों के भारी दबाव एवं मांग के चलते सरकार को अब दैशहित मे किसानों की मांग को तुरंत मान लेना चाहिए।