अवैध खनन पर पूर्णतः रोक लगे।

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आदरणीय उक्त विषय में निवेदन है कि देश में चाहते हुए भी अवैध खनन को रोका नहीं जा सका है और पर्यावरण प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पंहुच चुका है जिसके कारण दिल्ली NCR में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दीपावली पर पटाखे बेचने पर भी रोक लगा दी थी जिससे की पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सके। महोदय उक्त निर्दैश से स्पष्ट होता है कि आने वाले दिनों में सम्पुर्ण राष्ट्र में दीपावली उत्सव पटाखे विहीन हो जायेगा और राष्ट्र में पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए ईमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो सकते है । पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाने के लिए अवैध खनन भी प्रमुख कारक है।कई स्थानों पर ध़ड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। रेत से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियां धूल उड़ा रही हैं। जिससे लोग बीमार हो रहे हैं। प्रतिबंध के बाद भी जिम्मेदार अफसर इस पर रोक लगाने में नाकाम हैं। इतना ही नहीं कई स्थानों पर तो पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की जानकारी में होने के बाद भी खनन किया जा रहा है। पेडो़ं का कटान तो हो ही रहा है। जो पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी है। इसके साथ ही अवैध खनन भी पर्यावरण प्रदूषण के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। हालांकि लोगों के जहन में यह तथ्य नहीं है कि खनन से भी पर्यावरण प्रदूषण होता है। मिट्टी व रेत से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियां धूल उड़ाती हुई सड़कों पर दौड़ रही है। जिससे पर्यावरण को खतरा बना है। मान्यवर राजस्थान सरकार ने स्वीकार किया था कि अरावली की 138 में से 28 पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं।इतना ही नहीं खनिज विभाग की ओर से साल भर कार्रवाई की गई, लेकिन जिले में अवैध खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई। वहीं एफएसआई सर्वे में सैटेलाइट से देखा तो अलवर जिले में 274 स्थानों पर अवैध खनन दिखा।अलवर जिला लंबे समय से अवैध खनन की समस्या से जूझ रहा है। पूर्व में तिजारा, भिवाड़ी क्षेत्र में खान माफिया ने इस कदर अवैध खनन किया कि कई पहाड़ ही खत्म हो गए, या फिर अरावली पर्वतमाला का स्वरूप ही बदल गया। अवैध खनन की बढ़ती समस्या के चलते कार्रवाई भी की गई, लेकिन अवैध खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई। खनिज विभाग की ओर से वर्ष 2018-19 में करीब 65 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया गया, वहीं बीते साल विभाग की ओर से 45 करोड़ का राजस्व जुटाया गया। यानि खनिज विभाग ने सरकार का खजाना भरने में बीते साल से इस साल भूमिका निभाई। बीते साल की तुलना में बढ़ा अवैध खनन अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में वृद्धि के बावजूद आंकड़े इस साल अवैध खनन बढऩे की कहानी कह रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार खनिज विभाग ने वर्ष 2017-18 में अवैध खनन के विरुद्ध 48 लाख रुपए की पेनल्टी वसूली, वहीं वर्ष 2018-19 में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में वसूली 95 लाख रुपए तक पहुंच गई। यानि इस साल ज्यादा पेनल्टी वसूली गई। पेनल्टी वसूली में वृद्धि से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस साल अवैध खनन हुआ, जिसकी सामग्री पत्थर व बजरी आदि अवैध तरीके से बिकने बाजार में आई और कार्रवाई के दौरान पकड़ी जाने पर उनसे पेनल्टी वसूल की गई। मान्यवर अवैध खनन करने वालो की दबंगई इस कदर बड़ रही है अलवर में खनन माफ़ियाओं ने एक सिपाही को ट्रैक्टर से कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक कॉन्स्टेबल ने अवैध खनन कर ले जा रहे एक ट्रैक्टर को रोकने की की कोशिश की तो आरोपी ने उसे टक्कर मारकर गिरा दिया, इसके बाद कॉन्स्टबल ने आरोपी को भागकर पकड़ने की कोशिश की तो उसने ट्रैक्टर से कुचल दिया। मान्यवर अवैध खनन पर्यावरण के लिए ही नहीं लोगो की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है अवैध खनन देश कि प्रमुख समस्यां है जिसे रोकने पर कुछ हद तक प्रदूषण स्तर को रोका जा सकता है । हम अवैध खनन को रोकने के लिए निम्न उपाय कर सकते है ।

ग्रामीण स्तर पर सरपंच पुलिस व आमजन के सहयोग से एक अवैध खनन रोकथाम समिति बनायी जाये जिले स्तर पर इसमें पुलिस प्रशासन व विधायक राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री मुख्य सचिव आई जी सहित मुख्य न्यायधीश शामिल किये जाये। समिति को ग्रामीण स्तर से राज्य स्तर तक 15 दिवसीय रिपोर्ट पेश करने को निर्दैशित किया जाये जिसमें अवैध खनन को रोकने संबंधी कार्यवाही विवरण एवं अवैध खनन करने वाले लोगो के नाम शामिल हो। अवैध खनन प्रभावित क्षेत्रों का ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन हो और उपग्रह की मदद से उन क्षेत्रों पर निगरानी कि जाये। खनिज विभाग को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाये और गार्ड को सैटेलाईट फोन उपलब्ध करवाये जाये। अवैध खनन में संलिप्त लोगो की सूची ऑनलाईन की जाये और सजा में बढ़ोतरी सम्बन्धित संशोधन भी लोकसभा में पारित किए जाने हेतु सरकार को लिखा जाए। निरन्तर हो रही पहाड़ों की हत्या पर मौन रहना हमारे भविष्य के लिए खतरा है हम तो सुरक्षित है लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ी 'एक पहाड़ था" ऐसा किताबों में पढ़ेगी पहाड़ो को बचाने के लिए स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर भी अवैध खनन रोकथाम टॉस्क फोर्स बनायी जा सकती है जाए। देश में हो रहे रात दिन अवैध खनन का नियन्त्रण कुछ विशेष राजनैतिक पार्टी प्रतिनिधि और व्यापारियों के पास जिन पर उचित कार्यवाही की आवश्यकता है। देश कि लुटती संपदा अब आप ही बचा सकते है हमारे पहाड़ो को किस तरह लूटा और खत्म किया गया इसका साक्षात उदाहरण हरियाणा नूहं मेवात क्षेत्रों का दौरा करने पर पता चल सकता है । . आप इन धरोहरों को बचाने के लिए कठोर कार्यवाही किजिए अन्यथा देश में रायसीना हिल्स के अलावा कोई पहाड़ नहीं बचेगा। आपसे अनुरोध है कि केवल तीन माह के लिए मुझे इस कमेटी का गठन करने का अधिकार प्रदान करे व मुझे पूर्ण स्वतंत्रता दे। अवैध खनन को रोकने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओ की मदद ले जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओ एकत्र कर के उनसे राय ले तीनो कमेटी के मेंबर्स उनकी राय ले उस पर अमल करे । अवैध खनन कोई लाईलाज बीमारी नहीं है जिसे रोका नहीं जा सके इसे रोकना थोड़ा कठिन जरूर है लेकि नामुमकिन नहीं इसको रोकने के लिए सबसे पहले राजनेताओ को पाबंद करना होगा की किसी भी व्यक्ति अवैध खनन का कार्य करता है उसकी कोई सहायता नहीं करे इनको सबसे ज्यादा सहायता राजनेता ही प्रदान करते है ।अवैध खनन को रोकने के लिए एक मोबाइल एप लॉन्च किया जाए जिसमे कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज कर सके । समिति में हमे कुछ ऐसे व्यक्तियों को लेना चाइये जो राजनैतिक हो जैसे पुलिस में सी एल जी मेंबर कोई संस्था मेंबर अदि । कुछ गैर राजनैतिक संगठनों की मदद से भी हम अवैध खनन को रोक सकते है जैसे की राजस्थान युथ बोर्ड संस्था को राजस्थान सर्कार ने लिया है जो युथ के लिए काम कर रही है इस तरह इस समिति में राजस्थान की समस्त संगठनो को वालंटियर बनाये । मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हमे प्रदूषण रोकथाम मे सफलता प्राप्त होगी मान्यवर आपसे अनुरोध है कि जनहित याचिका स्वीकार करने का कष्ट करें।