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आरुषि और हेमराज के लिए न्याय

आरुषि, तलवार दम्पति की एकलौती पुत्री का क़त्ल उन्हीं के नोयडा स्थित फ़्लैट में 15 - 16 मई, 2008 की मध्य रात्रि को, उसके 14 वें जन्म के तकरीबन एक हफ़्ते पहले कर दिया गया | उनके घरेलु नौकर हेमराज की लाश दूसरे दिन 17 मई, बिल्डिंग की छत पर मिली |

मामला पहले उ.प्र. पुलिस देख रही थी .. बाद में CBI को मामला जांच के लिए सौंप दिया गया l .उ.प्र. पुलिस, ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना व गैर-पेशेवर तरीके से मामले की जांच की.. यहाँ तक कि समुचित तरीके से मौक़ा-ए-वारदात से सबूत एकत्र भी नहीं किये | अपनी इन खामियों को ढांकने के लिए पीड़ित माँ-बाप को ही क़त्ल का दोषी ठहरा दिया |

बहरहाल ‘पहली CBI टीम’ ने वैज्ञानिक तहकीकात व तफ्शीश के बाद उ.प्र. पुलिस के माँ-बाप को कातिल ठहराने के तर्क और दलील को ठुकरा दिया तथा‘तलवार दम्पति’ के कंपाउंडर कृष्णा के खिलाफ क़त्ल के पुख्ता सबूत होने का दावा किया |

इसी बीच, किन्हीं कारणों से ‘पहली CBI टीम’ की जगह एक ‘दूसरी CBI टीम ’को दे दी गई | ‘दूसरी CBI टीम’ ने ‘पहली CBI टीम’ के निष्कर्ष को नज़र-अंदाज़ करते हुए ‘नोयडा पुलिस की थ्योरी’ पकड़ ली और साक्ष्य के अभाव में, हेरफेर से माता पिता को फंसायाI

यह एक अभूत पूर्व स्थिति है जहां निर्दोष माता पिता को अपमानित किया गया, महीनों जेल में बंद किया गया और वह वर्तमान में परीक्षण के दौर से गुज़र रहे हैं | वास्तविक अपराधी अभी भी खुले आम घूम रहे हैं | हम इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से निर्दोष माता पिता को बचाने की अपील करते हैं |

‘दूसरी CBI टीम’ के दुर्भावनापूर्ण रवैये के कुछ उदाहरण व तथ्य निम्न है :

1. CBI ने CDFD की एक अहम रिपोर्ट को, जो कि नवंबर, 2008 में प्रस्तुत की गई, जिसमे कृष्णा के तकिये पर हेमराज़ के खून के निशान पाये गये,  झुठलाने की कोशिश की | CBI ने इस महत्वपूर्ण सबूत और कृष्णा के नारको टेस्ट (कृष्णा ने नार्को के दौरान अपराध कबूल किया) के बारे में ‘क्लोज़र रिपोर्ट’ में जान बूझ कर नहीं लिखा | ‘क्लोज़र रिपोर्ट’ दिसम्बर, 2010 में दाखिल की गई, जब कोर्ट के संज्ञान में ये बातें लाई गई तो उसे CBI ने टाइपिंग गलती बताकर खारिज कर दिया |

2. ‘पहली CBI टीम’ ने कृष्णा व उसके साथियों को वैज्ञानिक जांच के बाद गिरफ्तार किया था, लेकिन ‘दूसरी CBI टीम’ ने कृष्णा व उसके साथियों के खिलाफ वैज्ञानिक जांच के बाद मिले सबूतों को नज़र-अंदाज़ किया और उन्हें क्लीन चिट दे दी |

3. ‘कृष्णा’ के कमरे से मिली खुकरी,जो असली कातिल तक पहुँचने में सहायक हो सकती थी, उसको डीएनए विश्लेषण के लिए CDFD नहीं भेजा |

4. ‘दूसरी CBI टीम’ ने दुराग्रह पूर्ण तरीके से तलवार दम्पति को निर्दोष साबित करने वाले तमाम सबूत, जो ‘पहली CBI टीम’ ने हासिल किये थे, को दबाने की कोशिश की | CBI ने जान बूझकर ‘साउंड टेस्ट’ के बारे में क्लोज़र रिपोर्ट में नहीं लिखा और वैज्ञानिक परीक्षण निचली अदालत में प्रस्तुत नहीं कियेI

दोनों सी बी आई टीमों के बिलकुल विपरीत निष्कर्षों के कारण, हमारी मांग है कि एक स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाये |

यह आवश्यक है कि .. जिन सबूतों से पता चलता है की ‘माता पिता’ निर्दोष हैं ... और कृष्णा और उसके साथी दोषी हैं, उन सबूतों से छेड़छाड़ न होने दी जाये |

‘CBI की दूसरी टीम’ ने गलत तथ्यों के साथ मीडिया को सूचित किया, जिससे जनता के मन में ‘तलवार दम्पति’ की ग़लत छवि बन गई, साथ ही अदालतों को गुमराह किया |

चिंताजनक बात यह है कि ‘तलवार दम्पति’ की छवि खराब करने के इलावा वे 'आरुषि के लिए न्याय' के मुख्य उद्देश्य से भटक गए हैं |

आरुषि को कभी शांति नही मिलेगी अगर उसके माता पिता को गलत तरीके से फ़साया जाएगा |

हमारे न्याय के इस अभियान में इस याचिका पर हस्ताक्षर करके, आरुषि और हेमराज की मदद करें |

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