Central hospital haldwani

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    Inhuman behavior towards doctors

    आइये " डॉक्टर " को मारते हैं ----------------------------------- यह पोस्ट लिखते हुए मुझमे आक्रोश, भय, अपमान और क्षोभ का भाव है. मेरा लंगोटिया यार ( डॉ प्रमोद जोशी Pramod Joshi ) जो एक बेहतरीन ह्रदय रोग विशेषग्य ही नहीं एक बहुत सहृदय इंसान भी है, को लोगों ने पकड़ कर बड़ी बेरहमी से केवल इसलिए मारा कि वह एक डॉक्टर है. आज से कुछ महीने पहले तक डॉ. प्रमोद जोशी दिल्ली के सबसे बड़े हृदयरोग अस्पताल ' एस्कॉर्ट हॉस्पिटल ' में पंद्रह वर्षों से कार्यरत थे. आराम से रह रहे थे, बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे थे. लेकिन कुछ वर्षों से वह इस बात पर गंभीरता से सोच रहे थे कि बहुत सारे मरीज दूर दराज के इलाके से दिल्ली आने तक अपने प्राण गँवा देते हैं. यदि प्रशिक्षित डॉक्टर अपने व्यक्तिगत सुख सुविधाओं से आगे बढ़कर सोचे तो बहुत सारे लोगों की बहुत कम पैसों में जान बचाई जा सकती है. पहाड़ का आदमी कुछ ज्यादा ही भावुक होता है, तो झट से इसे मूर्त रूप देने के लिए भाई ने पूरा परिवार समेटा, बच्चों को स्कूल से निकाला और पहुँच गए ' हल्द्वानी ' अपने समाज की सेवा करने. मैं इस घटना से इसलिए भी ज्यादा परेशान हूँ कि इस फैसले के लिए मैं उत्प्रेरक का कार्य कर रहा था, और दिल्ली से इस परवार को विस्थापित कराने में मेरी बड़ी भूमिका थी. अब आते हैं इस घटना पर. हुआ यूं कि एक ब्लॉक प्रमुख साहेब को दिल का दौरा पड़ता है तुरंत अस्पताल लाया जाता है. डॉक्टर सब मरीजों को छोड़कर उनको ICU में भर्ती करता है, गंभीर बीमारी है, ह्रदय की रक्त पहुँचाने वाली सभी धमनियाँ अवरुद्ध हैं. सभी खतरे समझा कर आनन् फानन में ऑपरेशन किया जाता है जो सफल रहता है. डॉक्टर को आत्मसंतुष्टि है कि समय पर चिकित्सा उपलब्ध होने से एक जीवन बच गया. परन्तु अभी वह रात का खाना बारह बजे खा ही रहा था कि अस्पताल से कॉल आई कि मरीज की हालत पुनः गंभीर हो गई है. ऐसे में डॉक्टर अपने मुँह का कौर किसी तरह निगल कर बिना पानी पिए ही भागता है ( यह अतिशयोक्ति नहीं है - हमारे सभी डॉक्टर मित्र जानते हैं ). परन्तु इस बार मरीज को बचाया नहीं जा सका क्योंकि उसे Ventricular fibrillation नामक समस्या हुई है जो दवाओं और defibrillator से कंट्रोल नहीं हो सकी. जाहिर है डॉक्टर को भी बहुत बुरा लग रहा है, परन्तु वह भगवान् नहीं हो सकता. अस्पताल का बकाया बिल छोड़ दिया जाता है, रिश्तेदारों को बुलाकर सब समझा दिया जाता है. रिश्तेदार बॉडी को सुबह ले जाने के लिए कहकर चले जाते हैं. अगली सुबह " जल्लाद डॉक्टर " को बेरहमी से मारते है ब्लॉक प्रमुख के बेचारे लोग. #आइयेडॉक्टरकोमारतेहैं

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