Release the Hindu Woman Saint Sadhvi Prgya Thakur from the jail as STILL she has not even been charged.
  • Petitioning The Indian National Congress Party

This petition will be delivered to:

Currently ruling party in India
The Indian National Congress Party

Release the Hindu Woman Saint Sadhvi Prgya Thakur from the jail as STILL she has not even been charged.

    1. Sucheta Maheshwari
    2. Petition by

      Sucheta Maheshwari

      New York, United States

The Indian government is hell bent on destroying Hindus and their culture on their own land. Let's inform the world community about this.

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    News

    1. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      * 11 नवंबर को भायखला जेल में एक महिला कांस्टेबल की मौजूदगी में मुझे अपने वकील गणेश सोवानी से एक बार फिर 4-5 मिनट के लिए मिलने का मौका दिया गया. इसके अगले दिन
      * 13 नवंबर को मुझे फिर से 8-10 मिनट के लिए वकील से मिलने की इजाजत दी गयी. इसके बाद शुक्रवार * 14 नवंबर को शाम 4.30 मिनट पर मुझे मेरे वकील से बात करने के लिए 20 मिनट का वक्त दिया गया जिसमें मैंने अपने साथ हुई सारी घटनाएं सिलसिलेवार उन्हें बताई, जिसे यहां प्रस्तुत किया गया है.

      (मालेगांव बमकांड के संदेह में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा नासिक कोर्ट में दिये गये शपथपत्र पर आधारित.)

    2. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      * 1-11-2009 को दूसरा पालिग्राफिक टेस्ट किया गया. इसी के साथ मेरा नार्को टेस्ट भी किया गया.
      मैं कहना चाहती हूं कि मेरा लाई डिटेक्टर टेस्ट और नार्को एनेल्सिस टेस्ट बिना मेरी अनुमति के किये गये. सभी परीक्षणों के बाद भी मालेगांव विस्फोट में मेरे शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिल रहा था. आखिरकार
      * 2 नवंबर को मुझे मेरी बहन प्रतिभा भगवान झा से मिलने की इजाजत दी गयी. मेरी बहन अपने साथ वकालतनामा लेकर आयी थी जो उसने और उसके पति ने वकील गणेश सोवानी से तैयार करवाया था. हम लोग कोई निजी बातचीत नहीं कर पाये क्योंकि एटीएस को लोग मेरी बातचीत सुन रहे थे. आखिरकार
      * 3 नवंबर को ही सम्माननीय अदालत के कोर्ट रूम में मैं चार-पांच मिनट के लिए अपने वकील गणेश सोवानी से मिल पायी. 10 अक्टूबर के बाद से लगातार मेरे साथ जो कुछ किया गया उसे अपने वकील को मैं चार-पांच मिनट में ही कैसे बता पाती? इसलिए हाथ से लिखकर माननीय अदालत को मेरा जो बयान दिया था उसमें विस्तार से पूरी बात नहीं आ सकी. इसके बाद

    3. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      इस अस्पताल में कोई 3-4 दिन मेरा इलाज किया गया. यहां मेरी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था तो मुझे यहां से एक अन्य अस्पताल में ले जाया गया जिसका नाम मुझे याद नहीं है. यह एक ऊंची ईमारत वाला अस्पताल था जहां दो-तीन दिन मेरा ईलाज किया गया. इस दौरान मेरे साथ कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं रखी गयी. न ही होटल राजदूत में और न ही इन दोनो अस्पतालों में. होटल राजदूत और दोनों अस्पताल में मुझे स्ट्रेचर पर लाया गया, इस दौरान मेरे चेहरे को एक काले कपड़े से ढंककर रखा गया. दूसरे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मुझे फिर एटीएस के आफिस कालाचौकी लाया गया. इसके बाद
      * 23-10-2008 को मुझे गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के अगले दिन
      * 24-10-2008 को मुझे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नासिक की कोर्ट में प्रस्तुत किया गया जहां मुझे 3-11-2008 तक पुलिस कस्टडी में रखने का आदेश हुआ. 24 तारीख तक मुझे वकील तो छोड़िये अपने परिवारवालों से भी मिलने की इजाजत नहीं दी गयी. मुझे बिना कानूनी रूप से गिरफ्तार किये ही
      * 23-10-2008 के पहले ही पालीग्रैफिक टेस्ट किया गया. इसके बाद

    4. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      एटीएस की इस प्रताड़ना के बाद मेरे पेट और किडनी में दर्द शुरू हो गया. मुझे भूख लगनी बंद हो गयी. मेरी हालत बिगड़ रही थी. होटल राजदूत में लाने के कुछ ही घण्टे बाद मुझे एक अस्पताल में भर्ती करा दिया गया जिसका नाम सुश्रुसा हास्पिटल था. मुझे आईसीयू में रखा गया. इसके आधे घण्टे के अंदर ही भीमाभाई पसरीचा भी अस्पताल में लाये गये और मेरे लिए जो कुछ जरूरी कागजी कार्यवाही थी वह एटीएस ने भीमाभाई से पूरी करवाई. जैसा कि भीमाभाई ने मुझे बताया कि श्रीमान खानविलकर ने हास्पिटल में पैसे जमा करवाये. इसके बाद पसरीचा को एटीएस वहां से लेकर चली गयी जिसके बाद से मेरा उनसे किसी प्रकार का कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

    5. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      * 14 अक्टूबर को सुबह मुझे कुछ जांच के लिए एटीएस कार्यालय से काफी दूर ले जाया गया जहां से दोपहर में मेरी वापसी हुई. उस दिन मेरी पसरीचा से कोई मुलाकात नहीं हुई. मुझे यह भी पता नहीं था कि वे (पसरीचा) कहां है. 15 अक्टूबर को दोपहर बाद मुझे और पसरीचा को एटीएस के वाहनों में नागपाड़ा स्थित राजदूत होटल ले जाया गया जहां कमरा नंबर 315 और 314 में हमे क्रमशः बंद कर दिया गया. यहां होटल में हमने कोई पैसा जमा नहीं कराया और न ही यहां ठहरने के लिए कोई खानापूर्ति की. सारा काम एटीएस के लोगों ने ही किया.

      मुझे होटल में रखने के बाद एटीएस के लोगों ने मुझे एक मोबाईल फोन दिया. एटीएस ने मुझे इसी फोन से अपने कुछ रिश्तेदारों और शिष्यों (जिसमें मेरी एक महिला शिष्य भी शामिल थी) को फोन करने के लिए कहा और कहा कि मैं फोन करके लोगों को बताऊं कि मैं एक होटल में रूकी हूं और सकुशल हूं. मैंने उनसे पहली बार यह पूछा कि आप मुझसे यह सब क्यों कहलाना चाह रहे हैं. समय आनेपर मैं उस महिला शिष्य का नाम भी सार्वजनिक कर दूंगी.

    6. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      इसके बाद खानविलकर ने उसको किनारे धकेल दिया और बेल्ट से खुद मेरे हाथों, हथेलियों, पैरों, तलुओं पर प्रहार करने लगा. मेरे शरीर के हिस्सों में अभी भी सूजन मौजूद है.

      * 13 तारीख तक मेरे साथ सुबह, दोपहर और रात में भी मारपीट की गयी. दो बार ऐसा हुआ कि भोर में चार बजे मुझे जगाकर मालेगांव विस्फोट के बारे में मुझसे पूछताछ की गयी. भोर में पूछताछ के दौरान एक मूछवाले आदमी ने मेरे साथ मारपीट की जिसे मैं अभी भी पहचान सकती हूं. इस दौरान एटीएस के लोगों ने मेरे साथ बातचीत में बहुत भद्दी भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. मेरे गुरू का अपमान किया गया और मेरी पवित्रता पर सवाल किये गये. मुझे इतना परेशान किया गया कि मुझे लगा कि मेरे सामने आत्महत्या करने के अलावा अब कोई रास्ता नहीं बचा है.

    7. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      शाम को 5.15 मिनट पर मैं, सावंत और भीमाभाई सूरत से मुंबई के लिए चल पड़े. 10 अक्टूबर को ही देर रात हम लोग मुंबई पहुंच गये. मुझे सीधे कालाचौकी स्थित एटीएस के आफिस ले जाया गया था. इसके बाद अगले दो दिनों तक एटीएस की टीम मुझसे पूछताछ करती रही. उनके सारे सवाल 29-9-2008 को मालेगांव में हुए विस्फोट के इर्द-गिर्द ही घूम रहे थे. मैं उनके हर सवाल का सही और सीधा जवाब दे रही थी.
      अक्टूबर को एटीएस ने अपनी पूछताछ का रास्ता बदल दिया. अब उसने उग्र होकर पूछताछ करना शुरू किया. पहले उन्होंने मेरे शिष्य भीमाभाई पसरीचा (जिन्हें मैं सूरत से अपने साथ लाई थी) से कहा कि वह मुझे बेल्ट और डंडे से मेरी हथेलियों, माथे और तलुओं पर प्रहार करे. जब पसरीचा ने ऐसा करने से मना किया तो एटीएस ने पहले उसको मारा-पीटा. आखिरकार वह एटीएस के कहने पर मेरे ऊपर प्रहार करने लगा. कुछ भी हो, वह मेरा शिष्य है और कोई शिष्य अपने गुरू को चोट नहीं पहुंचा सकता. इसलिए प्रहार करते वक्त भी वह इस बात का ध्यान रख रहा था कि मुझे कोई चोट न लग जाए.

    8. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      यहां यह ध्यान देने की बात है कि सीधे तौर पर मुझे 10-10-2008 को गिरफ्तार नहीं किया गया. मुंबई में पूछताछ के लिए ले जाने की बाबत मुझे कोई सम्मन भी नहीं दिया गया. जबकि मैं चाहती तो मैं सावंत को अपने आश्रम ही आकर पूछताछ करने के लिए मजबूर कर सकती थी क्योंकि एक नागरिक के नाते यह मेरा अधिकार है. लेकिन मैंने सावंत पर विश्वास किया और उनके साथ बातचीत के दौरान मैंने कुछ नहीं छिपाया. मैं सावंत के साथ मुंबई जाने के लिए तैयार हो गयी. सावंत ने कहा कि मैं अपने पिता से भी कहूं कि वे मेरे साथ मुंबई चलें. मैंने सावंत से कहा कि उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए उनको साथ लेकर चलना ठीक नहीं होगा. इसकी बजाय मैंने भीमाभाई को साथ लेकर चलने के लिए कहा जिनके घर में एटीएस मुझसे पूछताछ कर रही थी.

    9. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      सूरत में सावंत से बातचीत में ही मैंने उन्हें बता दिया था कि वह एलएमएल फ्रीडम बाईक मैंने अक्टूबर 2004 में ही मध्यप्रदेश के श्रीमान जोशी को 24 हजार में बेच दी थी. उसी महीने में मैंने आरटीओ के तहत जरूरी कागजात (टीटी फार्म) पर हस्ताक्षर करके बाईक की लेन-देन पूरी कर दी थी. मैंने साफ तौर पर सावंत को कह दिया था कि अक्टूबर 2004 के बाद से मेरा उस बाईक पर कोई अधिकार नहीं रह गया था. उसका कौन इस्तेमाल कर रहा है इससे भी मेरा कोई मतलब नहीं था. लेकिन सावंत ने कहा कि वे मेरी बात पर विश्वास नहीं कर सकते. इसलिए मुझे उनके साथ मुंबई जाना पड़ेगा ताकि वे और एटीएस के उनके अन्य साथी इस बारे में और पूछताछ कर सकें. पूछताछ के बाद मैं आश्रम आने के लिए आजाद हूं.

    10. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      * 10-10-2008 को सुबह सूरत पहुंच गयी. रेलवे स्टेशन पर भीमाभाई पसरीचा मुझे लेने आये थे. उनके साथ मैं उनके निवासस्थान एटाप नगर चली गयी. यहीं पर सुबह के कोई 10 बजे मेरी सावंत से मुलाकात हुई जो एलएमएल बाईक की खोज करते हुए पहले से ही सूरत में थे. सावंत से मैंने पूछा कि मेरी बाईक के साथ क्या हुआ और उस बाईक के बारे में आप पडताल क्यों कर रहे हैं? श्रीमान सावंत ने मुझे बताया कि पिछले सप्ताह सितंबर में मालेगांव में जो विस्फोट हुआ है उसमें वही बाईक इस्तेमाल की गयी है. यह मेरे लिए भी बिल्कुल नयी जानकारी थी कि मेरी बाईक का इस्तेमाल मालेगांव धमाकों में किया गया है. यह सुनकर मैं सन्न रह गयी. मैंने सावंत को कहा कि आप जिस एलएमएल फ्रीडम बाईक की बात कर रहे हैं उसका रंग और नंबर वही है जिसे मैंने कुछ साल पहले बेच दिया था.

    11. हन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      * 23-9-2008 से 4-10-2008 के दौरान मैं इंदौर में थी और यहां मैं अपने एक शिष्य अण्णाजी के घर रूकी थी. 4 अक्टूबर की शाम को मैं अपने आश्रम जबलपुर वापस आ गयी.

      * 7-10-2008 को जब मैं अपने जबलपुर के आश्रम में थी तो शाम को महाराष्ट्र से एटीएस के एक पुलिस अधिकारी का फोन मेरे पास आया जिन्होंने अपना नाम सावंत बताया. वे मेरी एलएमएल फ्रीडम बाईक के बारे में जानना चाहते थे. मैंने उनसे कहा कि वह बाईक तो मैंने बहुत पहले बेच दी है. अब मेरा उस बाईक से कोई नाता नहीं है. फिर भी उन्होंने मुझे कहा कि अगर मैं सूरत आ जाऊं तो वे मुझसे कुछ पूछताछ करना चाहते हैं. मेरे लिए तुरंत आश्रम छोड़कर सूरत जाना संभव नहीं था इसलिए मैंने उन्हें कहा कि हो सके तो आप ही जबलपुर आश्रम आ जाईये, आपको जो कुछ पूछताछ करनी है कर लीजिए. लेकिन उन्होंने जबलपुर आने से मना कर दिया और कहा कि जितनी जल्दी हो आप सूरत आ जाईये. फिर मैंने ही सूरत जाने का निश्चय किया और ट्रेन से उज्जैन के रास्ते

    12. बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - उनकी ही जुबानी

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा - एक साध्वी को हिन्दू होने की सजा और कितनी देर तक ?
      बहन प्रज्ञा की सचाई अवश्य पढ़े |

      मैं साध्वी प्रज्ञा चंद्रपाल सिंह ठाकुर, उम्र-38 साल, पेशा-कुछ नहीं,
      7 गंगा सागर ...अपार्टमेन्ट, कटोदरा, सूरत,गुजरात राज्य की निवासी हूं जबकि मैं मूलतः मध्य प्रदेश की निवासिनी हूं. कुछ साल पहले हमारे अभिभावक सूरत आकर बस गये. पिछले कुछ सालों से मैं अनुभव कर रही हूं कि भौतिक जगत से मेरा कटाव होता जा रहा है. आध्यात्मिक जगत लगातार मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहा था. इसके कारण मैंने भौतिक जगत को अलविदा करने का निश्चय कर लिया और 30-01-2007 को संन्यासिन हो गयी.

    13. Reached 10,000 signatures
    14. इस देश मे अगर किसी को जमानत नही मिल सकती है तो वह है - साध्वी प्रज्ञा :'(

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      ए. राजा को जमानत मिल गयी,
      कलमाडी को जमानत मिल गयी,
      कनिमोझी को जमानत मिल गयी,
      इस देश मे हर भष्ट्राचारी, हर बलात्कारी , हर आँतकवादी,
      हर गुनहगार को जमानत मिल सकती है,
      अगर किसी को जमानत नही मिल सकती है तो वह है --- साध्वी प्रज्ञा सिँह ठाकुर !!
      क्योकि इनका गुनाह अत्यन्त गँभीर है ... ये देशभक्त व सच्चाई का साथ देती है !!

    15. साध्वी प्रज्ञा जी के लिए न्याय ( Justice For Sadhvi Pragya Ji )

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      क्या आप जानते हैं कि... जब भी देश में कोई आतंकी वारदात होती है सरकार और मुस्लिम झट से रटा रटाया प्रलाप शुरू कर देते हैं कि ""आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है" और वे हिन्दू आतंकवाद के उदाहरण के तौर पर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी का नाम लेते हैं..!

    16. साध्वी प्रज्ञा जी के लिए न्याय ( Justice For Sadhvi Pragya Ji )

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      तो... इस सम्बन्ध में मैं आपको बता दूँ कि .. इस देश की अस्मिता अभी तक हिंदू लोकाचार और हिंदू धर्म के पीछे का सच "आध्यात्मिकता" के कारण ही सुरक्षित है . औसत हिंदू हमारे हिन्दुस्थान के करीब एक लाख गांवों में मिलते हैं जो... सरल, सहज आध्यात्मिकता के पास और अपनी विविधता को स्वीकार करते हैं .

      चाहे आप ईसाई या मुस्लिम, जैन या अरब, फ्रेंच या चीनी हैं. यह हिंदुत्व ही है जो भारतीय ईसाई को एक फ्रेंच ईसाई से , या एक अरबी मुस्लिम को भारतीय मुसलमान से अलग बनाता है.

      ये हम हिन्दुओं का हिंदुत्व ही है कि वे दुनिया के सीरियाई ईसाई, पारसी, यहूदी, आर्मीनियाई, और आज, तिब्बतियों के पार से सताए गए अल्पसंख्यकों को अपने यहाँ शरण दी है...!

      इतना ही नहीं.... आपको यह जानकर काफी सुखद आश्चर्य होगा कि... अस्तित्व के 10,000 वर्षों में हिन्दू सैन्य शक्ति ने किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया है ना ही कभी दूसरों पर बल प्रयोग अथवा धर्मान्तरण द्वारा दूसरों पर अपना धर्म थोपने की कोशिश की है .. जो कि इस्लाम और क्रिश्चन में बहुत ही आम है..!

    17. साध्वी प्रज्ञा जी के लिए न्याय ( Justice For Sadhvi Pragya Ji )

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      और तो और .... आप दुनिया में कहीं भी एक भी हिंदू आतंकवादी संगठन नहीं पाओगे ...

      फिर भी ये बहुत ही दुखद है कि ... हिन्दुओं को आज भारतीय और पश्चिमी प्रेस सिमी जैसे आतंकवादी समूहों के साथ तुलना करते हैं जो किसी साधारण सी बात पर भी निर्दोष नागरिकों की हत्या और चर्चों को जलने तक से गुरेज नहीं करते हैं..

      हम यह भी जानते हैं कि ........ सांप्रदायिक दंगों के पीछे अक्सर तथाकथित रूप से एक ही अल्पसंख्यक समूह (मुस्लिमों) का हाथ होता है (गोधरा और सावरमति एक्सप्रेस की घटना सबको याद ही होगी )

      मुस्लिम और मीडिया अक्सर .. बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर अपनी छातियाँ पीटते नजर आते हैं लेकिन..... बाबरी मस्जिद के बाद हुए ""मुंबई ब्लास्ट" में हुए हजारों मासूमों की हत्या और करोड़ों के आर्थिक नुकसान की बात पर सबको मानो सांप सूंघ जाता है..!

    18. साध्वी प्रज्ञा जी के लिए न्याय ( Justice For Sadhvi Pragya Ji )

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      हम यह भी जानते हैं कि ........ सांप्रदायिक दंगों के पीछे अक्सर तथाकथित रूप से एक ही अल्पसंख्यक समूह (मुस्लिमों) का हाथ होता है (गोधरा और सावरमति एक्सप्रेस की घटना सबको याद ही होगी )

      अब जरा हिन्दू आतंकवाद की बात भी कर ही लेते हैं.... एक लंगड़ा तैमूरलंग नामक लुटेरा अरब से 1399 ईस्वी में भारत आया था जिसने मात्र एक ही दिन में जेहाद के नाम पर 100000 (एक लाख) हिन्दुओं को क़त्ल कर दिया था...

      सन 1900 ईस्वी में कश्मीर घाटी में लगभग 10 ,00 ,000 (दस लाख ) हिन्दू थे जहाँ आज सिर्फ महज कुछ सौ ही बच पाए हैं...!

      गोवा में पुर्तगालियों ने धर्मपरिवर्तन के नाम पर हजारों ब्राह्मणों को सूली पर लटका दिया था...!

      और तो और.... आज भी देश के विभिन्न भागों में जेहाद के नाम पर रोज बम विस्फोट हो रहे हैं जिसमे हजारों हिन्दू मारे जा रहे हैं..!

      आज भी सरकार द्वारा हिन्दुओं के सबसे पवित्र जगह ""अमरनाथ"" में हिन्दुओं को बुनियादी सुविधाओं तक से वंचित किया जा रहा है जबकि मुस्लिमों को हज पर भारी सब्सिडी दी जा रही है..!

    19. साध्वी प्रज्ञा जी के लिए न्याय ( Justice For Sadhvi Pragya Ji )

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      इन सबसे उत्साहित होकर सरकार और उनके नुमाइंदे आज एक हानि रहित 84 वर्षीय स्वामी और साध्वी प्रज्ञा सिंह को पकड़ कर रखे हुए है और उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित कर रहे है .. उनके देवताओं की निन्दा कर रहे हैं..!

      यह कोई नया नहीं है ....... यह गुजरात में हुआ. यह जम्मू में हुआ है, फिर कंधमाल, मंगलौर और मालेगांव में.... कल को फिर कहीं और हो सकता है..!

      इसीलिए .. चाहे वो भाजपा हो... संघ या फिर बजरंग दल..... उन्हें साध्वी पर शर्मिंदा होने के बजाए उनकी दुखी आवाज को सुनना चाहिए.. उनकी मदद को आगे आना चाहिए...!

      आज भारत में एक अरब हिंदुओं, जो कि इस ग्रह पर हर छह व्यक्तियों में एक हैं.... दुनिया में सबसे सफल, कानून का पालन करने वाले और एकीकृत समुदायों के हैं ..

      क्या आप कभी ऐसे समुदाय की तुलना सिमी, लश्कर, या अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठन से कर सकते हो...????

      अगर ऐसा ही चलता रहा तो.... हिन्दू , जिसे महात्मा की उपाधि से विभूषित किया जाता है .... एक सहज क्रांति की ओर अग्रसर हो जाएंगे.... बिना किसी राजनीतिक नेतृत्व के ...!

      जय महाकाल...!!!
      स्रोत: Francois Gautier

    20. साध्वी प्रज्ञा जी के लिए न्याय ( Justice For Sadhvi Pragya Ji )

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      नीचे लिखे पोस्ट में से सिर्फ + का निशान हटायें और कही भी कमेन्ट में या पोस्ट में लिख कर एंटर का बटन दबाएँ
      @+[265927326828947:]

    21. A movement to save Shadvi ji

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      साध्वी प्रज्ञा जी के लिए न्याय
      ( Justice For Sadhvi Pragya Ji )

    22. Is Hindu Terror as big as it is made out to be? - Vivek Gumaste

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      Is Hindu Terror as big as it's made out to be? - Vivek Gumaste

      February 9, 2012

      [Is the focus on 'saffron terror' a deranged attempt at politically counterbalancing Hindus and Muslims with little regard for ethical impropriety? asks Vivek Gumaste.]

      There is something radically wrong with the entire picture; the pieces of the puzzle do not align with each other despite attempting every possible combination; and the key does not open the lock. The foremost investigating agency in the nation, the National Intelligence Agency, despite its extensive reach and limitless resources and despite the fact that the theatre of operation for this specific sleuthing lies within its ambit, continues to fumble in the dark trying desperately to unearth tangible evidence that would nail the culprits responsible for acts of violence branded as 'Hindu terror.'

      Such a dead end scenario calls for serious introspection and compels us, willy nilly, to explore the logical options underlying this

    23. प्रज्ञा ठाकुर की बात नहीँ सारा हिँदुत्व निशाने पर।

      Sucheta Maheshwari
      Petition Organizer

      "यह एक नया खतरा आया फिर से केसरिया बाने पर।
      प्रज्ञा ठाकुर की बात नहीँ सारा हिँदुत्व निशाने पर।"
      - कवि मनोज कुमार

    24. Reached 1,000 signatures

    Supporters

    Reasons for signing

      • 23 days ago

      Release her please Immediately

      REPORT THIS COMMENT:
    • Rajesh Kumar INDIA
      • 24 days ago

      she has been falsely implicated

      REPORT THIS COMMENT:
      • 24 days ago

      Being a Hindu is not a Crime !!

      REPORT THIS COMMENT:
    • SAMIR VAID INDIA
      • 24 days ago

      BECAUSE SHE HAS BEEN FALSELY IMPLICATED

      REPORT THIS COMMENT:
      • 25 days ago

      Coz justice, freedom and respect for woman are values I cherish

      REPORT THIS COMMENT:

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